हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आख़ूंद जलाल क़ारी बहलके ने क़ादिमून वर्ल्ड असेंबली के सहयोग से आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “बअसते उम्मते मोहम्मद” में सूरह आले-इमरान की कुछ आयतों की तिलावत करते हुए कुरआन के संदेशों पर चिंतन की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सूरह आले-इमरान की आयत 118 से 120 तक मुसलमानों को सतर्क रहने, अपने ईमान की रक्षा करने और दुश्मनों व विरोधियों के सामने डटे रहने का संदेश देती हैं।
क़ारी बहलके ने सूरह आले-इमरान की इन आयतों का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह तआला ने इन आयतों में उन लोगों के साथ मुसलमानों के संबंधों के बारे में चेतावनी दी है जो उनसे दुश्मनी रखते हैं। मोमिनों को भरोसेमंद लोगों और अपने निजी रहस्यों के लिए योग्य व्यक्तियों के चयन में सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।
उन्होंने कुरआन की आयतों में तदब्बुर और चिंतन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल कुरआन पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अर्थ और संदेश पर विचार करना तथा अल्लाह के आदेशों के उद्देश्य को समझने का प्रयास करना भी आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि इन आयतों में कुछ समूहों की मोमिनों के प्रति छिपी और खुली दुश्मनी का उल्लेख किया गया है। ऐसे लोग मुसलमानों को नुकसान, कमजोरी और कठिनाई में देखकर खुश होते हैं, जबकि उनकी सफलता, सम्मान और भलाई उन्हें अप्रसन्न करती है।
इस धार्मिक विद्वान ने कहा कि यदि मुसलमान आपस में मतभेद, एक-दूसरे की बुराई, नुकसान पहुंचाने और कमजोरी का शिकार होंगे तो दुश्मन इससे खुश होंगे। लेकिन यदि मुसलमान एकजुट, दृढ़ और अपने ईमान पर कायम रहेंगे तो दुश्मन उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे।
क़ारी बहलके ने अपने संबोधन में ईश्वरीय आदेशों का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुरआन मोमिनों को दृढ़ रहने तथा अल्लाह द्वारा निर्धारित हलाल और हराम की सीमाओं की रक्षा करने का आह्वान करता है। मुसलमानों को दबाव और दुश्मनी के सामने मजबूती से खड़ा रहना चाहिए।
उन्होंने पवित्र कुरआन को चमत्कार, शक्ति और मार्गदर्शन से भरपूर किताब बताते हुए उपस्थित लोगों से कहा कि वे एकांत में कुरआन की आयतों का अध्ययन करें, उनके अनुवाद और तफ़्सीर से मदद लें और उनके अर्थ व संदेश पर चिंतन करें।
अंत में क़ारी बहलके ने मुसलमानों को विभिन्न समस्याओं और नुकसानों से सुरक्षित रखने के लिए दुआ की और उपस्थित लोगों से इस्लाम की भलाई के लिए ख़ुलूस के साथ दुआ करने तथा सलवात पढ़ने का आग्रह किया।
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