हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मदरसा खैरुल उलूम, चंदवाटोरी में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में आयोजित मजलिस-ए-मुन्तज़िमा और सद्भावना सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा कि एकेश्वरवाद में विश्वास रखने वालों के बीच एकता और आपसी एकजुटता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि ईरान ने मुसलमानों के साहसपूर्ण इतिहास को एक बार फिर दुनिया के सामने पेश किया है। उनके अनुसार, ईरान केवल अपने देश को बचाने के लिए नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
मदरसा खैरुल उलूम, चंदवाटोरी में आयोजित इस भव्य सम्मेलन की अध्यक्षता जमीयत उलेमा झारखंड के अध्यक्ष हज़रत मौलवी क़यामुद्दीन मज़ाहिरी ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी मदरसे के प्रबंधक मौलवी दानिश मज़ाहिरी ने निभाई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। ईरान के मौजूदा संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान ने मुसलमानों के साहस और प्रतिरोध के इतिहास को दुनिया के सामने प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता, तो आज दुनिया में मुसलमानों को सिर झुकाकर रहना पड़ता। उपस्थित लोगों ने उनके विचारों की सराहना की और उलमा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव हाजी शाह उमैर ने भी अपने संबोधन में आपसी एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलवी कलीमुद्दीन ने कहा कि मुसलमानों में शैक्षणिक पिछड़ापन एक बड़ी समस्या है।
नई पीढ़ी का अरबी और उर्दू भाषाओं से दूर होना भी चिंता का विषय है। उन्होंने इस दिशा में विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस्लाम बिखराव का नहीं, बल्कि एकता और सामूहिकता का धर्म है।
मौलवी डॉ. सलमान क़ासमी ने कहा कि दुश्मन का मुकाबला तभी किया जा सकता है, जब मुसलमान एकजुट हों। वहीं, मौलवी तल्हा नदवी और मौलवी असग़र मिस्बाही ने भी उलमा और मुसलमानों से अपनी एकता को मजबूत करने की अपील की।
इस सम्मेलन में मौलवी आज़ाद, मौलवी मुफ़्ती अनवर क़ासमी, मौलवी इसरारुल हक़ क़ासमी, मौलवी मिन्हाजुद्दीन मिस्बाही और मौलवी क़ाज़ी उज़ैर क़ासमी सहित अनेक उलमा शामिल हुए। चतरा के पुलिस कमिश्नर, थाना प्रभारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। वक्ताओं ने भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। आयोजकों की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। अंत में सम्मेलन के जिम्मेदारों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का दिल से आभार व्यक्त किया।
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