हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मरकज़ी प्रांत में वली-ए-फकीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह कुर्बान अली दरी नजफाबादी ने अराक स्थित मदरसा-ए-इल्मिया इमाम खुमैनी (रह.) के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र अपने संकल्प को मजबूत करें, अल्लाह से अपने वादे और प्रतिबद्धता को दृढ़ बनाएं तथा आध्यात्मिक और व्यावहारिक तैयारी के साथ इस्लाम, कुरान और अहले बैत (अ.) की रक्षा के लिए मजबूत किला बनें।
उन्होंने कहा कि छात्रों को भविष्य में इस्लामी जगत की जिम्मेदारियां संभालने के लिए अभी से स्वयं को तैयार करना चाहिए।
आयतुल्लाह दरी नजफाबादी ने मदरसा-ए-इल्मिया इमाम खुमैनी (रह.), अराक के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए धार्मिक शिक्षाओं से परिचित और ईमानदार व्यक्तियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हौज़ा इल्मिया ने इतिहास के विभिन्न कालखंडों में अहले बैत (अ.) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार, धार्मिक विद्वानों के प्रशिक्षण और समाज का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने हौज़ा इल्मिया क़ुम की स्थापना और विकास में विद्वानों तथा धार्मिक हस्तियों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि हौज़ा इल्मिया क़ुम, विशेष रूप से वर्तमान दौर में, इस्लामी जगत के महत्वपूर्ण शैक्षणिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल है। छात्रों का प्रशिक्षण और इस्लामी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में है।
अराक के इमामे जुमा ने छात्रों को उनके उद्देश्य और धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के मूल कारणों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र को सबसे पहले अपने लिए सही मार्ग चुनना चाहिए, ताकि भविष्य में वह दूसरों का मार्गदर्शन कर सके। हौज़ा इल्मिया में शिक्षा प्राप्त करने का वास्तविक उद्देश्य इस्लाम, कुरान और अहले बैत (अ.) की सेवा करना तथा धार्मिक शिक्षाओं को स्पष्ट करना और उनका प्रचार-प्रसार करना होना चाहिए।
उन्होंने ज्ञान के साथ उस पर अमल, तक़वा, निष्ठा, शैक्षणिक प्रयास और धार्मिक मूल्यों के पालन को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों को शिक्षा के दौरान उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और भविष्य की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित करना चाहिए।
आयतुल्लाह दरी नजफाबादी ने आगे कहा कि हौज़ा इल्मिया को छात्रों की शैक्षणिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे धार्मिक प्रचार, अध्यापन, सांस्कृतिक गतिविधियों और विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे ज्ञान प्राप्त करने, आत्मसुधार और जनता की सेवा के मार्ग पर गंभीरता से आगे बढ़ें। साथ ही, समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी ज्ञान और कौशल हासिल करें।
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