बुधवार 21 अक्टूबर 2026 - 06:22
हौज़ा और विश्वविद्यालय इस्लामी क्रांति के विचारों और मूल्यों के अनुरूप ज्ञान-विज्ञान के विकास में भूमिका निभाएं

आयतुल्लाह आराफी :

हौज़ा और विश्वविद्यालय इस्लामी क्रांति के विचारों और मूल्यों के अनुरूप ज्ञान-विज्ञान के विकास में भूमिका निभाएं

इस्लामी क्रांति के अनुरूप एक आदर्श विश्वविद्यालय के लिए ज्ञान, मनुष्य, वह्य और समाज की व्यापक समझ आवश्यक

हौज़ा इल्मिया क़ुम के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने ईरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय परिसर ‘हिकमत व टेक्नोलॉजी’ तथा ‘इंस्टीट्यूट ऑफ नॉलेज, सिविलाइज़ेशन एंड इरफ़ान’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इस्लामी क्रांति के अनुरूप एक आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा इल्मिया कुम के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने ईरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्राष्ट्रीय परिसर ‘हिकमत व टेक्नोलॉजी’ तथा ‘इंस्टीट्यूट ऑफ नॉलेज, सिविलाइज़ेशन एंड इरफ़ान’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इस्लामी क्रांति के अनुरूप एक आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने ज्ञान-विज्ञान के प्रति व्यापक दृष्टिकोण अपनाने, मनुष्य की वास्तविक पहचान समझने, दार्शनिक और बौद्धिक आधारों को मजबूत बनाने, वह्य पर आधारित शिक्षाओं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण बताया।

आयतुल्लाह आराफी ने अपने संबोधन की शुरुआत इस्लाम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने शैक्षणिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाली महान हस्तियों, विशेष रूप से शहीद चमरान और अन्य विद्वानों के संघर्षों का उल्लेख किया तथा उन्हें शैक्षणिक केंद्रों के लिए अनुकरणीय आदर्श बताया।

आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की अवधारणा

आयतुल्लाह आराफी ने आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए ज्ञान-विज्ञान के प्रति व्यापक दृष्टिकोण को बुनियादी महत्व दिया। उनके अनुसार, ज्ञान को केवल सीमित शैक्षणिक या तकनीकी गतिविधि के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे मनुष्य, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं से जोड़कर समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान की व्यापक समझ का संबंध मनुष्य की संपूर्ण पहचान से भी है। जब व्यक्ति के व्यक्तित्व, उसकी बौद्धिक और नैतिक आवश्यकताओं तथा उसकी व्यक्तिगत और सामाजिक भूमिका को ध्यान में रखा जाएगा, तो शिक्षा के उद्देश्य भी अधिक स्पष्ट और सार्थक होंगे।

ज्ञान के दार्शनिक, बौद्धिक और वह्य पर आधारित पहलू

आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि एक आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण विशेषताओं में ज्ञान के प्रति दार्शनिक, बौद्धिक और सैद्धांतिक दृष्टिकोण भी शामिल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक गतिविधियों की नींव मजबूत वैचारिक और सैद्धांतिक सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए, ताकि ज्ञान के उद्देश्यों, उसकी सीमाओं और मानव जीवन में उसकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

उन्होंने ज्ञान के वह्य पर आधारित और आध्यात्मिक पहलुओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, इस्लामी शिक्षण संस्थानों में ज्ञान-विज्ञान के विकास के साथ वह्य की शिक्षाओं और धार्मिक मूल्यों से जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है। इससे वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रगति को इस्लामी विचारधारा तथा मानवीय आध्यात्मिकता के साथ जोड़ा जा सकता है।

ज्ञान के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू तथा भविष्य की चुनौतियां

आयतुल्लाह आराफी ने अपने संबोधन में ज्ञान के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को समाज की आवश्यकताओं, सांस्कृतिक परिस्थितियों और सामूहिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक तथा अनुसंधान संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने भविष्य की आवश्यकताओं को समझने तथा वैज्ञानिक और शैक्षणिक क्षेत्र में संभावित चुनौतियों और जोखिमों की पहले से पहचान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आदर्श शैक्षणिक संस्थान वे हैं जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को समझने, नई समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए अपनी शैक्षणिक तथा अनुसंधान क्षमताओं का उपयोग करने में सक्षम हों।

शैक्षणिक संस्थान और इस्लामी क्रांति की विचारधारा

आयतुल्लाह आराफी ने इस्लामी क्रांति के वैचारिक और सैद्धांतिक पहलू को भी आदर्श इस्लामी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अपनी शिक्षा और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों में इस्लामी क्रांति के वैचारिक सिद्धांतों तथा मूल्यों को ध्यान में रखते हुए ज्ञान-विज्ञान के विकास में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने हौज़ा इल्मिया और विश्वविद्यालयों के बीच संबंधों को भी विशेष महत्व दिया तथा इसे ईरान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक एवं बौद्धिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण विषय बताया।

हौज़ा और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग से शैक्षणिक प्रगति

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा इल्मिया और विश्वविद्यालयों के बीच संपर्क एवं सहयोग को ज्ञान-विज्ञान की उन्नति और बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक बताया। उनके अनुसार, दोनों शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग से शिक्षा और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है तथा ज्ञान के विभिन्न पहलुओं से लाभ उठाने के बेहतर अवसर पैदा होते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सिद्धांतों और दृष्टिकोणों को व्यावहारिक रूप देने के लिए अभी और प्रगति तथा सुधार की गुंजाइश है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों को निरंतर समीक्षा, अनुसंधान और विकास की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दर्शन’ पुस्तक का विमोचन

उद्घाटन समारोह के समापन पर ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दर्शन’ विषय पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रौद्योगिकी और दार्शनिक विमर्श के बीच संबंधों को उजागर करने वाली शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा था।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha