हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की मजलिसे उलमा मकतबे अहलेबैत के तत्वावधान में महिलाओं के लिए तीन दिवसीय ऑनलाइन “शहीदे उम्मत (र) प्रशिक्षण कार्यशाला” आयोजित की गई। इसका विषय “हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत की रोशनी में तरबीयत के सुनहरे सिद्धांत” था। इस कार्यशाला में पाकिस्तान, भारत और ईरान सहित विभिन्न देशों की बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यशाला को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. मोहम्मद अली मुमताज़ ने विशेष रूप से संबोधित किया।
उन्होंने शिक्षा और प्रशिक्षण के आपसी संबंध तथा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.) की सीरत की रोशनी में प्रभावी तरबीयत के बुनियादी सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान बच्चों की नैतिक और धार्मिक तरबीयत, मजबूत चरित्र निर्माण तथा आधुनिक युग की तरबीयती चुनौतियों से निपटने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि शिक्षा के साथ प्रभावी तरबीयत कैसे संभव बनाई जा सकती है, बच्चों में नैतिकता, धार्मिक चेतना और मजबूत चरित्र का विकास कैसे किया जाए, आधुनिक युग की चुनौतियों के मद्देनजर बेहतर तरबीयत की क्या आवश्यकताएं हैं और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत से तरबीयत के कौन-कौन से सुनहरे सिद्धांत प्राप्त किए जा सकते हैं।
डॉ. मोहम्मद अली मुमताज़ ने स्पष्ट किया कि एक सफल शिक्षक केवल जानकारी देने वाला नहीं होता, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक तरबीयत और बौद्धिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बच्चों के साथ प्रेम और स्नेहपूर्ण व्यवहार, अच्छे आचरण, सकारात्मक बातचीत, उनकी मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझने तथा उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियां अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
तीन दिवसीय इस कार्यशाला को शैक्षिक, बौद्धिक और प्रशिक्षण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं सफल बताया गया।
प्रतिभागियों ने विषयों के चयन, प्रभावी प्रस्तुति और व्यावहारिक मार्गदर्शन की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
प्रतिभागियों ने मजलिसे उलमा मकतबे अहलेबैत पाकिस्तान के इस शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी प्रयास की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई, ताकि महिलाएं, प्रचारक और शिक्षक आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बच्चों की शिक्षा और तरबीयत में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
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