हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मुहम्मद बाक़िर तबातबाई निजाद ने गुज़श्ता रात हरम-ए-मुतहर करीमा-ए-अहलेबैत हज़रत मासूमा क़ुम सलामुल्लाह अलैहा में मुनअक़िद एक प्रोग्राम से ख़िताब करते हुए कहा कि उबूदियत-ए-ख़ुदा इंसान को वक़ार, सरबलंदी और हक़ीक़ी इज़्ज़त अता करती है, और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने राह-ए-उबूदियत में अपनी हर चीज़ क़ुर्बान करके इज़्ज़तमंदों, इज़्ज़त के तालिबों और इज़्ज़त के अलमबरदारों को इज़्ज़त का सही मफ़हूम सिखाया।
उन्होंने वाक़ेआ-ए-विलादत-ए-इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि जब हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को गहवारे समेत रसूल-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद स.ल.व. की ख़िदमत में पेश किया गया, तो आपने उस नूरानी चेहरे को देखा, सैयदुश्शोहदा अलैहिस्सलाम की पेशानी को बोसा दिया और गिरया करते हुए तीन मर्तबा उस क़ौम पर लानत फ़रमाई जो इस बच्चे को शहीद करेगा।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन तबातबाई निजाद ने बताया कि जब रसूल-ए-ख़ुदा स.ल.व. से पूछा गया कि इस बच्चे को कौन क़त्ल करेगा, तो आपने फ़रमाया: बनी उमय्या के लोग एक दिन मेरे इस फ़रज़ंद को घेर लेंगे और उसे शहीद कर देंगे।
हरम ए मुत्तहर हज़रत मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के इस ख़तीब ने मज़ीद कहा कि आज अगर बाज़ अफ़राद इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का नाम सुनते ही इश्क़-ओ-मोहब्बत में आँसू बहाने लगते हैं, तो उन्हें जान लेना चाहिए कि यह उनके हक़ में रसूल-ए-इस्लाम स.ल.की दुआ की क़बूलियत की अलामत है।
उन्होंने रसूल-ए-अकरम स.ल.व. के इस फ़रमान की याददिहानी कराई कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम तमाम अहल-ए-इज़्ज़त के इमाम हैं, और वाज़ेह किया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने ख़ुदावंद-ए-मुतआल की बंदगी की राह में सब कुछ क़ुर्बान करके दुनिया को इज़्ज़त का अमली दर्स दिया।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन तबातबाई-निजाद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इज़्ज़त का पहला और सबसे अहम सबब इबादत-ए-ख़ुदावंदी है, और कहा कि अगरचे अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम इल्म, विसायत, तहारत, विलायत और मारिफ़त की अज़ीम इज़्ज़तों के हामिल थे, मगर इसके बावजूद वह बारगाह-ए-इलाही में अर्ज़ करते थे,
ऐ परवरदिगार! मेरी सबसे बड़ी इज़्ज़त तेरी इबादत है।
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