कर्बला केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि इंसान के ज़मीर के सामने रखा हुआ वह आईना है, जिसमें हर दौर का इंसान अपना चेहरा देख सकता है। आशूरा केवल एक दिन नहीं है, बल्कि हक़ और बातिल के बीच…
अज़ा के दिनों के आखिरी दिनों में हर साल की तरह इस साल भी “कुरआन और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम” के शीर्षक से पांच मजलिसों का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। लगभग दो दशकों से जारी इस वार्षिक कार्यक्रम…