आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी (7)
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उलेमा और मराजा ए इकरामपैग़म्बर (स.) के बाद उम्मत में तफ़्सीर और फ़िक़्ह से जुड़ी कमियों को पूरा करने की क्षमता नहीं थीः आयतुल्लाह सुबहानी
हज़रत आयतुल्लाह सुब्हानी ने पैग़म्बरे अकरम (स) के बाद कुरआन की तफ़्सीर, धार्मिक अहकाम के बयान, लोगों के सवालों के जवाब देने और धर्म में नई बिदअतों को रोकने के क्षेत्र में पैदा होने वाली कमियों…
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आयतुल्लाहिल उज़्मा जाफ़र सुबहानी:
उलेमा और मराजा ए इकरामआयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शिराज़ी ने अपनी उम्र के लगभग हर वर्ष के बराबर इल्मी आसार छोड़े हैं
आयतुल्लाहिल उज़्मा जाफ़र सुबहानी ने आयतुल्लाहिल उज़्मा नासिर मकारिम शिराज़ी की इल्मी सेवाओं को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि "नवाचार" और समय की माँगों के अनुसार धार्मिक ज्ञान की प्रस्तुति, उनकी…
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उलेमा और मराजा ए इकरामकुरआन की शिक्षाओं को नए अंदाज और कलात्मक शैली के साथ नौजवानों तक पहुंचाया जाएः आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी
हौज़ा / आयतुल्लाहिल अज़मा जाफर सुब्हानी ने 33वीं अंतर्राष्ट्रीय कुरान प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी तक कुरान के ज्ञान को रोजमर्रा की…
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आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी:
उलेमा और मराजा ए इकरामउलेमा और दानिशवरों का सम्मान एक अख़्लाक़ी फ़र्ज़ है
हौज़ा / आयतुल्लाह जाफ़र सुब्हानी ने उस्ताद मोहम्मद अली मेंहदवी राद के एज़ाज़ में होने वाली तक़रीब के नाम अपने पैग़ाम में कहा है कि उलेमा और दानिशवरों की इज़्ज़त और तकरीम एक अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी…
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धार्मिकक्यों कभी कभी हमें अपने दोस्तों से भी तक़य्या करना पड़ता है?
हौज़ा / मरहूम आयतुल्लाह बुरूजर्दी कहते हैं कि इमाम जाफर सादिक अ.स. कभी-कभी तक़ैय्या के तौर पर यहां तक कि अपने शिया के साथ भी जवाब दिया करते थे क्योंकि उनका इरादा हकीकत जानने का नहीं होता था बल्कि…
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आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी:
उलेमा और मराजा ए इकरामविद्वानों की बहसों में "परस्पर सम्मान" और "जेदाले अहसन" ज़रूरी हैं
हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाह सुब्हानी ने मरहूम अल्लामा मजलिसी (अ) का उदाहरण देते हुए, जिन्होंने चार सौ लोगों के सहयोग से अपनी एक रचना पूरी की थी, कहा: "परस्पर सम्मान" और "जिदाले अहसन" विद्वानों की…
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आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी:
उलेमा और मराजा ए इकरामजो अपने समय की परिस्थितियों से अवगत है और समय की आवश्यकताओं को पहचानता है, वह भटकता नहीं है
हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी ने कहा:हौज़ा ए इल्मिया को चाहिए कि फ़िक़्ह, कलाम, तफ़सीर और तबलीग़ के क्षेत्रों में भविष्य की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाते हुए उसके लिए योजना बनानी…