इंसान (5)
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उलेमा और मराजा ए इकरामकौन-सी आवश्यकता इंसान को कमाल तक पहुँचाती है?
इंसान को सिर्फ भौतिक और पशुवत आवश्यकताएँ नहीं होतीं, बल्कि उसे एक उच्चतर आवश्यकता भी है – और वह है अल्लाह के निकट होना । नबियों और इस्लाम का अंतिम लक्ष्य 'मारेफ़तुल्लाह' है, और बंदगी ही इस निकटता…
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धार्मिकसीमित पाप का अंत हमेशा रहने वाली सज़ा क्यों है?
हौज़ा/ सवाब और सज़ा के हमेशा रहने की सच्चाई तब साफ़ हो जाती है जब हम उन्हें एक कॉन्ट्रैक्ट वाले कानून के तौर पर नहीं, बल्कि दुनिया में इंसान के सोच-समझकर किए गए कामों और पसंद का नैचुरल नतीजा…
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धार्मिककर्बला: शऊर की दहलीज़ पर हिदायत की दस्तक
हौज़ा/ जब दोनो दुनियाओं के बनाने वाले ने हज़रत इंसान को जेवर ए वुजूद से सुशोभित किया तो उसकी खिलक़त का पूर्ण विवरण पिता के सुल्ब से माँ के गर्भ तक और माँ के गर्भ की सभी स्थितियो को क़ुरआन करीम…
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भारतभारत में हिंदू-मुस्लिम एकता की दो शानदार मिसालें; जम्मू और पीलीभीत में इंसानियत ने धर्म से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ा
हौज़ा/ भारत में एक बार फिर धार्मिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल सामने आई है, जहां जम्मू में एक हिंदू समाजसेवी ने एक मुस्लिम पत्रकार की मदद की और पीलीभीत में एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू ड्राइवर…
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धार्मिकआयात ए ज़िदगी । अल्लाह से इंसान की पहली गुज़ारिश
हौज़ा / अल्लाह की रहमते वासेआ पाने का एकमात्र तरीका है खुद पर और दूसरों पर रहम करना, क्योंकि ज़ुल्म - चाहे वह खुद पर हो या दूसरों पर - इंसान को उस बड़ी और सबको शामिल करने वाली अल्लाह की रहमत…