ज़ियारत ए आशूरा का सजदा (6)
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धार्मिकशरई अहकाम । क्या ज़ियारत-ए-आशूरा का सज्दा हाथ पर करना सही है?
हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन फ़लाहज़ादे ने ज़ियारत-ए-आशूरा के बाद किए जाने वाले सज्दे की शर्तों के बारे में एक सवाल के जवाब में बताया कि सज्दे के सामान्य इस्लामी नियमों का पालन करना आवश्यक है…
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धार्मिकज़ियारत-ए-आशूरा | इस्लामी जीवन-शैली का घोषणापत्र
ज़ियारत-ए-आशूरा में व्यक्त शिक्षाएँ व्यक्तित्व निर्माण और व्यवहार सुधार के बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित हैं। इसमें मौजूद दुआ “अल्लाहुम्मा इज्अल महयाय महया मुहम्मद व आले मुहम्मद” को एक समग्र…
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धार्मिकज़ियारत-ए-आशूरा | सिल्म से हरब तक; अहलेबैत (अ) की दोस्ती और दुश्मनी का नमूना
अहलेबैत (अ) के दुश्मनों के लिए रास्ता आसान बनाना, चाहे वह किसी छोटे या भौतिक बहाने से ही क्यों न हो, एक प्रकार से उनके साथ मेल-जोल और सहमति मानी जाती है। आज भी हम एक कठिन सांस्कृतिक और राजनीतिक…
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धार्मिकज़ियारत-ए-आशूरा | क्या अहलेबैत (अ) के दुश्मनों की पहचान, विलायत स्वीकार करने की बुनियाद है?
ज़ियारत-ए-आशूरा के विभिन्न अंशों की व्याख्या में यह बताया गया है कि अल्लाह और अहलेबैत (अ) के क़रीब होना कोई भौतिक या स्थानिक निकटता नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक, नैतिक, व्यवहारिक और मारफ़ती निकटता…
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धार्मिकज़ियारत ए आशूरा | सलाम का स्थान और इमाम हुसैन (अ) का रसूलुल्लाह (स) से संबंध
इस्लामी संस्कृति में “सलाम” शांति, मित्रता और भलाई की निशानी है। इसी कारण मुस्लिम बिन अकील ने इब्न ज़ियाद को, जिसकी सत्ता को वह स्वीकार नहीं करते थे, सलाम नहीं किया। और इमाम हुसैन (अ) ने भी यह…
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ज़ियारत ए आशूरा के कुछ फ़िक़रात पर चिंतनः
धार्मिकहुसैन पर अल्लाह का सलाम हो का मतलब, अल्लाह की रज़ा हुसैन (अ) की रज़ा मे है
हौज़ा / "علیک منی جمیعا سلام الله अलैका मिन्नी जमीअन सलामुल्लाह" का मतलब है—मेरे दिल और जुबान से सारे सलाम इमाम हुसैन (अ) की खिदमत मे है। यह वाक्य सबसे सच्चे प्यार और दिल से जुड़े गहरे रिश्ते…