हौज़ा / दुआ के क़ुबूल होने की एक शर्त यह है कि उसे पूरे ज़ेहन व दिल की पूरी तवज्जो से माँगें, कभी कभी सिर्फ़ ज़बान से कहा जाता है ए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे, ऐ अल्लाह मेरी रोज़ी बढ़ा दे, ऐ अल्लाह…
हौज़ा / वह इंसान जिसे रूहानी सुकून हो उसकी सोच सही रहती है, वह सही फ़ैसले करता है और सही क़दम उठाता है। ये सब अल्लाह की रहमतों की निशानियाँ हैं।याद रहे ज़िक्रे इलाही से ही दिलों को इतमेनान नसीब…
हौज़ा / हम दुआ को मामूली चीज़ न समझें, अल्लाह से कुछ तलब करने को मामूली बात न समझें। आपसे जहाँ तक मुमकिन हो दुआ को अल्लाह के सामने ऐसे माहौल में पेश कीजिए जिसमें आपकी बेहतरीन हालत हो, रोने और…
हौज़ा / दुआ ईमान वाले इंसान का सबसे प्रभावी और श्रेष्ठतम साधन है, और यदि इसका प्रभाव तुरंत दिखाई न भी दे, तो उचित समय पर अवश्य प्रकट होता है। दुआ का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता, बस कभी-कभी देर…
हौज़ा / दुआ करने के साथ-साथ उचित प्रयास करना भी ज़रूरी है अल्लाह तआला ने इंसान को सोच समझकर और मेहनत के साथ काम करने का हुक्म दिया है, और फिर उस पर भरोसा तवक्कुल करते हुए दुआ करने को कहा है।