हर दिन दुआ ए अहद पढ़कर इमाम ज़माना (अ) के प्रति अपनी निष्ठा का नवीनीकरण करने का फ़ैसला करें। आइए हम शहादत के लिए तैयार रहें और यह दुआ करें कि मरने के बाद भी, हम कब्र से उठकर हाथ में तलवार लेकर…
हौज़ा / दुआ के क़ुबूल होने की एक शर्त यह है कि उसे पूरे ज़ेहन व दिल की पूरी तवज्जो से माँगें, कभी कभी सिर्फ़ ज़बान से कहा जाता है ए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे, ऐ अल्लाह मेरी रोज़ी बढ़ा दे, ऐ अल्लाह…