बसीरत (14)
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मुल्तान में नहजुल बलाग़ा सम्मेलन का आयोजन;
दुनियाविद्वानों ने मौलाए कायनात (अ) की शिक्षाओं और वर्तमान दौर में उनकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए
जामिया मख़ज़नुल उलूम अल-जाफ़रिया, मुल्तान के दो दिवसीय वार्षिक कार्यक्रम के अवसर पर मरकज़ अफ़कार-ए-इस्लामी पाकिस्तान के सहयोग से नहजुल बलाग़ा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विद्वानों…
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5 जमादिउल अव्वल: आस्था, चरित्र, महिला प्रशिक्षण और वाक़िया-ए-कर्बला के संदर्भ में एक संक्षिप्त इल्मी एवं शोधपरक लेख
धार्मिकसय्यदा ज़ैनब बिन्ते अली सलामुल्लाह अलैहा: ज्ञान,बसीरत, सब्र और इस्तिक़ामत की शाश्वत मिसाल
हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा ऐसी महान हस्ती हैं, जिन्होंने कर्बला में अपने चरित्र से क़ुर्बानी की महानता को उजागर किया और कूफ़ा व शाम के दरबारों में सत्य की आवाज़ बुलंद करके यह स्पष्ट कर…
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क़ुम अल मुकद्दस मे खुत्बा ए जुमाः
ईरानहजरत जैनब (स) की सीरत से आज के दौर के लिए सात अहम सबकः आयतुल्लाह सईदी
आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद सईदी ने कहा कि हजरत जैनब सलामुल्लाह अलैहा ज्ञान, बसीरत, परिस्थितियों की समझ, सब्र, दृढ़ता और त्याग का आदर्श हैं। उन्होंने अमीरुल मोमिनीन हजरत अली अलैहिस्सलाम की शिक्षाओं…
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छजुपूरा बिजनौर उत्तर प्रदेश मे खुत्बा ए जुमाः
भारतफ़ितनों के दौर में बसीरत की अहमियत और जंगे-जमल से मिलने वाले सबक़ः सय्यद महदी अब्बास ज़ैदी
छजुपुरा सादात मे 16 अक्टूबर 2026 को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद महदी अब्बास ज़ैदी साहब ने नमाज़ ए जुमा के खुत्बे मे इस्लामी इतिहास की एक अहम घटना, यानी जंगे-जमल, पर चर्चा करेंगे।…
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अमलापुरम आंध्राप्रदेश मे खुत्बा ए जुमाः
भारतबसीरत के बिना सही और गलत की पहचान संभव नहीं; इस्लामी नारों के बजाय आचरण को देखें: मौलाना सय्यद अब्बास बाक़री
अमलापुरम के इमामे जुमा मौलाना सय्यद अब्बास बाक़री ने जुमे के ख़ुत्बे में बसीरत (सही समझ) के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि हक और बातिल की पहचान केवल धार्मिक नारों और बाहरी पहचान से नहीं, बल्कि…
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छजुपूरा बिजनौर उत्तर प्रदेश मे खुत्बा ए जुमाः
भारतफितनों की पहचान, हक़ और बातिल में अंतर करने के लिए तक़वा और बसीरत ज़रूरी हैः सय्यद महदी अब्बास ज़ैदी
छजुपुरा सादात मे 9 अक्टूबर 2026 को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद महदी अब्बास ज़ैदी साहब ने नमाज़ ए जुमा के खुत्बे मे कहा कि हक़ और बातिल के बीच अंतर करने, फितनों की पहचान करने तथा…
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शिया ईदगाह हुसैनाबाद, झारखंड मे खुत्बा ए जुमा:
भारतदुनिया भर में बढ़ते वैचारिक और सामाजिक फसाद का मुकाबला समझदारी और धार्मिक चेतना से संभव है: मौलाना सय्यद अली सजीर रिजवी
हुसैनाबाद, झारखंड के इमामे जुमा मौलाना सैयद अली सज्जीर रिजवी ने आज शिया ईदगाह हुसैनाबाद, झारखंड में जुमे के खुतबे में "फसाद और उसका निवारण" विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कुरआन मजीद की…
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धार्मिकधर्म की व्याख्या में इफ़रात और तफ़रीत के खतरो पर सिरात से भी पतला मार्ग
धर्म के पालन और धार्मिक विषयों पर विचार व्यक्त करने के दौरान इफ़रात और तफ़रीत से बचना तथा संतुलन बनाए रखना हमेशा एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। धार्मिक ग्रंथों में ‘सिरात’ को बाल से भी पतली राह…
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ईरानबसीरत और दृढ़ता इस्लामी व्यवस्था की स्थिरता का रहस्य हैं।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मदी लायिनी
हौज़ा/ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मदी लायिनी ने कहा कि बसीरत और दृढ़ता इस्लामी व्यवस्था की स्थिरता का रहस्य हैं। आज समाज की एकता के खिलाफ कोई बात नहीं कही जानी चाहिए।
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दिन की हदीसः
धार्मिकपैग़म्बर (स) की सीरत में नमाज़ की अहमियत
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) एक रिवायत में नमाज़ की अहमियत और पैग़म्बर ए अकरम (स) की सीरत में इसके विशेष स्थान की ओर संकेत करते हैं।
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अमीरुल मोमेनीन की आरेफ़ाना नसीहत;
उलेमा और मराजा ए इकरामगुनाह को केवल हराम नहीं, बल्कि ज़हर और गंदगी समझें; आयतुल्लाह जवादी आमोली
आयतुल्लाह जवाद आमोली ने नैतिकता के एक पाठ में इबादत के विभिन्न स्तरों और गुनाह के बारे में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की आध्यात्मिक और गहरी नसीहतों को बयान किया।
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उलेमा और मराजा ए इकरामइमाम जवाद (अ) की राजनीतिक सीरत, अहलेबैत (अ) की तागूत के खिलाफ संघर्ष की निरंतरता थी
ख़ुरासान रज़वी में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर देते हुए कि अहलेबैत (अ) की राजनीतिक सीरत आशूरा आंदोलन की निरंतरता है, कहा: सभी चौदह मासूम इमामों (अ) ने तागूत और अत्याचारी सत्ता…
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भारतसीरत हज़रत फातेमा ज़हरा (स) पर उच्च स्तरीय तहकीक,वक्त की अहम ज़रूरत हैंः डॉ. शहवार हुसैन नक़वी
हौज़ा / हज़रत फातेमा ज़हरा सल्लल्लाहु अलैहा व आलिहा के पवित्र जन्मदिन के अवसर पर, मस्जिद इमामिया में सीरत-ए-फातिमा ज़हरा सल्लल्लाहु अलैहा व आलिहा पर संबोधन में शोधकर्ता डॉ. शहवार हुसैन नकवी ने…
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उलेमा और मराजा ए इकरामबसीरत और तवाज़ो के बिना मानवी मक़ामात तक रसाई सम्भव नही हैः हुज्जतुल इस्लाम सय्यद रहीम तवक्कुल
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लेमीन सय्यद रहीम तवक्कुल ने कहा कि इंसान अगर बसीरत, तवाज़ो और ख़ुलूस के साथ ज़िन्दगी के क़ीमती लमहात से फ़ायदा उठाए तो वह मामूली अफ़राद से बुलंद होकर आला-तरीन रूहानी…