मिर्ज़ा मिस्बाह यज्दी (8)
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उलेमा और मराजा ए इकरामअल्लामा मिस्बाह यज़दी: अहले बैत (अ) से तवस्सुल व्यवस्था की स्थिरता और समाज की सुरक्षा की गारंटी है
स्वर्गीय अल्लामा मुहम्मद तक़ी मिस्बाह यज़दी ने अहले बैत (अ) से लगातार तवस्सुल करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि मोमिनों को अपने हर फैसले और कार्य में हज़रत वली-ए-अस्र इमाम महदी (अ) की ओर…
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उलेमा और मराजा ए इकरामशाम में इमाम सज्जाद (अ) का ख़ुत्बा प्रभावशाली क्यों हुआ, लेकिन कूफ़ा में इमाम हुसैन (अ) के ख़ुत्बो का वैसा प्रभाव क्यों नहीं पड़ा?
आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी (र) ने कहा कि हर समाज के लोग ईमान, समझ और धार्मिक मूल्यों के पालन में समान नहीं होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि कूफ़ा में यद्यपि अनेक ईमानदार और अहलेबैत (अ) से प्रेम करने…
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ईरानअमेरिका को भूल जाओ, इबादत करो!
शैतान कभी-कभी इंसान को हलाल या यहाँ तक कि मुस्तहब कामों के ज़रिए धोखा देता है ताकि वह ज़्यादा अहम और वाजिब कर्तव्य से पीछे रह जाए। वह कहता है: "अपनी नमाज़ पढ़, अपनी इबादत कर, समाज के मामलों से…
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उलेमा और मराजा ए इकराममनुष्य के पथभ्रष्ट होने की जड़ हवस परस्ती है
मनुष्य के सभी विचलनों की जड़ और ईश्वर की आज्ञाकारिता एवं बंदगी में मुख्य समस्या हवस परस्ती ही है। अन्यथा, पैगंबरों की आज्ञाकारिता जहाँ मनुष्य की इच्छा और चाहत के अनुरूप हो, वहाँ कोई बड़ी बात…
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धार्मिकहर दिन ईमानदारी के साथ दुआ ए अहद पढ़ने का फ़ैसला करें
हर दिन दुआ ए अहद पढ़कर इमाम ज़माना (अ) के प्रति अपनी निष्ठा का नवीनीकरण करने का फ़ैसला करें। आइए हम शहादत के लिए तैयार रहें और यह दुआ करें कि मरने के बाद भी, हम कब्र से उठकर हाथ में तलवार लेकर…
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आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी (र) के बयानात का अंश;
ईरानहज़रत फ़ातिमा (स) का संदेश | ख़ुत्बा ए फ़दक में इस्लामी उम्मत के प्रारंभिक विचलनों का विवरण
हौज़ा / हज़रत फातिमा (सला मुल्ला अलैहा) ने खुत्बा ए फ़दक में इस्लामी उम्मत के शुरुआती विचलन को बड़ी स्पष्टता से बयान किया है। आपने फरमाया कि अभी रसूल-ए-खुदा (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेहि वसल्लम)…
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उलेमा और मराजा ए इकरामहमने कौन सा अमल सिर्फअल्लाह के लिए किया?
हौज़ा / हमारा समय और हमारा इल्म कीमती पूंजी है। इसे या तो मामूली और बेकार कामों में बर्बाद किया जा सकता है, या कभी-कभी हम इसे किसी ज़हरीली चीज़ के बराबर नुकसानदेह काम में लगा देते हैं। हर पल…
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धार्मिककहीं ऐसा न हो कि कल को तुम कहो कि हमने पहचाना नहीं और हमें पता नहीं था
हौज़ा / हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (सला मुल्ला अलैहा) अपने ख़ुत्बे की शुरुआत में जागरूक करने वाले लहजे में फ़रमाती हैं: “मैं फ़ातिमा हूँ, मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेहि व सल्लम) की बेटी।” इसके बाद…