मौलाना अली हाशिम आबिदी (20)
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धार्मिकइमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत और ऐतिहासिक रुकावटें
तारीख गवाह है कि ज़ालिम हुक्मरान हमेशा कर्बला को ज़ुल्म और इस्तिबदाद के खिलाफ बेदारी, हक़गोई, आज़ादी और मुज़ाहिमत का मरकज़ समझते रहे। इसी लिए उन्होंने हर दौर में ज़ाइरिन-ए-इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम…
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धार्मिकआयतुल्लाहिल उज़्मा हाजी मुल्ला अली कनी; इल्म, मरजेईयत, दूरदृष्टि और दृढ़ता का एक उज्ज्वल अध्याय
शिया इतिहास में कुछ ऐसी महान हस्तियाँ हुई हैं जिनकी सेवाएँ केवल शिक्षा-दीक्षा, फ़िक़्ह, इज्तेहाद या धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अपने चरित्र, दूरदृष्टि और निर्भीकता से पूरे…
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धार्मिकग्यारह मुहर्रम 61 हिजरी: पैग़म्बर के अहले-बैत पर होने वाले अत्याचारों के नए अध्याय का आरंभ
61 हिजरी का ग्यारह मुहर्रम इस्लामिक इतिहास का वह अत्यंत दुखद दिन है जब आशूरा की घटना के बाद पैग़म्बर के अहले-बैत पर होने वाले अत्याचारों का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
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धार्मिकआशूरा: हक़ और बातिल के संघर्ष में वफ़ादारी, त्याग और बलिदान की अमर गाथा
यौमे-आशूरा, इस्लामी इतिहास का वह महान दिन है जब हज़रत इमाम हुसैन (अ) और उनके वफ़ादार साथियों ने कर्बला के मैदान में सत्य, न्याय और इस्लाम की प्रतिष्ठा के लिए अद्वितीय बलिदान देकर अत्याचार और…
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धार्मिकदार और मिंबर का अजीब इम्तिज़ाज /जब हज़रत मीसम अलैहिस्सलाम ने सूली को ख़िताबत का आसमान बना दिया
हौज़ा / बाज़ औक़ात तारीख़ के उफ़ुक़ पर ऐसे मंज़र नमूदार होते हैं जिनके सामने क़लम लरज़ने लगता है, अल्फ़ाज़ ख़ामोश हो जाते हैं और अक़्ल हैरत के समंदर में डूब जाती है। हज़रत मीसम तम्मार अलैहिस्सलाम…
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धार्मिक6 ज़िलहिज्जा; मंसूर दवानीक़ी का नरकवास
6 ज़िलहिज्जा शिया इतिहास और शिया प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों, जैसे तारीख-ए-दिमश्क़, तारीख-ए-तबरी और शेख अब्बास क़ुमी की रचनाओं में वर्णित है कि 6 ज़िलहिज्जा…
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धार्मिकनिफ़ाक़ ख़फ़ी, ज़ाहिर की दीनदारी और बातिन की बग़ावत
मानव इतिहास की सबसे खतरनाक बीमारी वह नहीं है जो शरीर को कमजोर कर दे, बल्कि वह है जो आत्मा को खोखला कर दे। कभी-कभी कुफ़्र स्पष्ट होता है; उसका चेहरा सामने होता है और उसकी पंक्तिबद्धता प्रत्यक्ष…
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धार्मिकमीलाद ए सुलतान ए अरब व अजम
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की शहादत का घाव अभी उनके आदरणीय पुत्र इमाम मूसा काज़िम (अ) के दिल में ताज़ा था, और उनके शियों पर भी मातम की चादर तनी हुई थी। मदीना मुनव्वरा अपने हक़ीक़ी इमाम, हज़रत सादिक़-ए-आले…
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धार्मिकशहीद नेता की आवाज़: आसान शादी; सादगी का इंक़लाबी मेनिफेस्टो
शहीद नेता आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई (र) के उपदेश हमें यह सिखाते हैं कि सादगी अपनाना वास्तव में एक क्रांतिकारी कदम है, एक ऐसा कदम जो न केवल व्यक्ति का जीवन बदलता है, बल्कि पूरे समाज…
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धार्मिकमोहब्बतो की कसौटी पर ईमान का फैसला
इतिहास गवाह है कि जुल्म कभी अपनी ताकत से नहीं जीता, बल्कि मज़लूम के समर्थकों की ख़ामोशी से जीता है। जब हक़ के पैरोकार अकेले रह जाएँ और बाकी सब दर्शक बन जाएँ, तो जुल्म को रास्ता मिल जाता है। यही…
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धार्मिकइमाम ए ज़माना (अ) का जन्म
यह वह दौर है जिसमें इंसान ने बोलना तो सीख लिया है, लेकिन सुनना भूल गया है। हर जगह आवाज़ें हैं—बयान, दावे, नारे—लेकिन खामोशी में छिपा सच दुर्लभ हो गया है।
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धार्मिकमानवता का रोल मॉडल; हज़रत ज़ैनब ए कुबरा (स)
हौज़ा/ इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा सवाल यह रहा है कि क्या ताकत सच को जन्म देती है या सच ताकत को? दुनिया के अलग-अलग धर्मों, सभ्यताओं और संस्कृतियों ने इस सवाल का अपने-अपने तरीके से जवाब दिया, लेकिन…
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धार्मिकहमारे सवाल और इमाम मुहम्मद बाकिर (अ) के जवाब
हौज़ा / हज़रत इमाम जाफ़र सादिक (अ) ने कहा: "मेरे पिता अल्लाह को बहुत याद करते थे। जब मैं उनके साथ चलता था, तो वे चलते हुए भी अल्लाह को याद करते थे, और जब मैं उनके साथ खाता था, तो वे अल्लाह को…
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भारतअहलेबै़त अलैहिमुस्सलाम ने ज़ालिम की मदद करने से रोका है।मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी
हौज़ा / मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी ने फरमाया,जिस तरह ज़ुल्म करना बुरा है उसी तरह ज़ालिम की मदद करना भी बुरा है बल्कि मासूमीन अलैहिमुस्सलाम की हदीसों की रोशनी में ज़ालिम की मदद करने वाला और उनके…
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भारतइमाम ए ज़माना अ.ज. की मारफ़त नहीं तो कोई क़द्र व क़ीमत नहीं।मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी
हौज़ा / अमीर ए क़लाम, अमीर-ए-बयान, मौला-ए-मुत्तक़ियान अमीरुल मोमिनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया,हर इंसान की क़द्र व क़ीमत उसकी मारेफत के हिसाब से है।
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मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी
धार्मिकइमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शियों से उम्मीदें
हौज़ा / हज़रत इमाम हसन अस्करी अ.स. की कुछ अहादीस जिनमें आप ने शियों के सिफ़ात बयान फ़रमाए हैं, जिनके जानने और उन पर अमल करने का नतीजा दुनिया व आख़िरत में सआदत व कामयाबी है।
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भारतनेक औलाद की तर्बियत करने वाली ख़ातून भी समाज की मुस्लेह है।मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी
हौज़ा / आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी सीस्तानी द० ज़ि० की अहलिया मरहूमा की वफ़ात की मुनासिबत से इंजीनियर सैयद मज़हर अब्बास साहब की जानिब से मस्जिद काला इमामबाड़ा पीर बुखारा में बाद नमाज़े…
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धार्मिकमीलाद ए नूर ए अव्वल रसूले अकरम (स)
हौज़ा/ज़ाते वाजिब ने अपने परिचय के लिए एक नूर पैदा किया और इस नूर अव्वल को 2, 5, 14 में विभाजित किया। अपनी उदारता में, इसने प्रत्येक प्राणी को अस्तित्व का वस्त्र प्रदान किया। चाहे वह सिंहासन…
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धार्मिकज़मीन इमाम ग़ायब के मुबारक वूजुद से बची हुई है
हौज़ा/अल्लाह तआला ने मानवता की प्रसन्नता और मार्गदर्शन के लिए नबियों और रसूलों (अ) को भेजा, और जब अंतिम नबि, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (अ) की शहादत के साथ नबियों और रसूलों का सिलसिला समाप्त हुआ,…
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28 सफ़र उल-मुज़फ़्फ़र के अवसर पर विशेष इंटरव्यू:
धार्मिकपैग़म्बर मुहम्मद (स) के आदर्शों पर चलकर ही हमारा समाज एक मुस्लिम समाज बन सकता है: मौलाना सय्यद अली हाशिम आबिदी
हौज़ा/ 28 सफ़र उल-मुज़फ़्फ़र के अवसर पर हौज़ा न्यूज़ एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, मौलाना सय्यद अली हाशिम आबिदी ने कहा कि पैग़म्बर मुहम्मद (स) का आदर्श ही मुसलमानों की खुशी और सफलता…