हौज़ा / एहतियाते वाजिब की बिना पर (अमदन) जानबूझकर ऐसा करना जायज़ नहीं है अगर (सहव्न) भूल कर पड़े तो नमाज़ सही हैं।
हौज़ा/मर्द का औरत के जैसा बनना,और औरत का मर्द के जैसा बनना एहतियाते लाज़िम की बेना पर हराम हैं और उस से मुराद यह है की एक दूसरे की सूरत अख्तियार करना और मर्द का औरत के लिबास (कपड़े) और औरत का…