हौज़ा / महिला, केवल एक शब्द नहीं; यह एक ब्रह्मांड है। सामान्य धारणा में उसे कमजोर समझा गया, आँसुओं से जोड़ा गया, लेकिन जो आँखें अश्रु बहाती हैं, वही राष्ट्रों की नियति का क्षितिज भी प्रकाशित…