हौज़ा न्यूज़ एजेंसी |
प्रश्न: एक व्यक्ति को यह पता नहीं होता कि उसने मुकल्लफ होने के समय से अब तक कितनी नमाज़ें क़ज़ा की हैं, और चूँकि उसे वस्वास की समस्या है, इसलिए वह संख्या को बहुत अधिक मानता है और इस कारण से क़ज़ा नमाज़ें नहीं पढ़ता है। अब उसकी ज़िम्मेदारी क्या है?
उत्तर: यह व्यक्ति उन नमाज़ों को पढ़ने से संतुष्ट हो सकता है जिनके क़ज़ा होने के बारे में उसे यकीन है, और संदिग्ध संख्या के संबंध में उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।
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