हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मद रज़ा अली अकबरी ने शहर माहनशाह की जुमआ की नमाज़ के खुतबों में रहबर-ए मोअज़्ज़म इंकलाब-ए इस्लामी के मिल्लत-ए ईरान के नाम हालिया खिताब का हवाला देते हुए कहा, इन बयानों ने देश के सामान्य माहौल पर गहरा प्रभाव डाला और 12 दिवसीय युद्ध की जीत की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय आत्म विश्वास और दुश्मन के खिलाफ सामर्थ्य की भावना को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा,रहबर-ए इंकलाब ने बसीज को एक राष्ट्रीय पूंजी और व्यापक आंदोलन बताया जो विभिन्न नस्लों में और मजबूत होनी चाहिए उनके अनुसार बसीज सिर्फ एक संस्था नहीं है बल्कि हर गैरतमंद और ईमान वाला व्यक्ति जो देश की तरक्की के लिए किसी भी मैदान में कोशिश करे, वह असली बासिजी है।
इमाम-ए जुमआ माहन शाह ने कहा,यही जज्बा राष्ट्रीय ताकत में वृद्धि और वैश्विक स्तर पर प्रतिरोध के लिए एक प्रेरणादायक नमूना है।
उन्होंने आगे कहा, अमेरिका और सियोनीस्ट शासन ने आधुनिकतम हथियारों के बावजूद मिल्लत को निज़ाम-ए इस्लाम से अलग नहीं कर सके बल्कि इसके विपरीत राष्ट्रीय एकता और मजबूत हुई और यही मिल्लत-ए ईरान की असली कामयाबी और दुश्मन की यकीनी हार है।
हुज्जतुल इस्लाम अली अकबरी ने कहा,ईरान की तरक्की का रहस्य राष्ट्रीय एकता के संरक्षण, सरकार का समर्थन, फिजूलखर्ची से परहेज और खुदा से आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने में है।
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