सोमवार 12 जनवरी 2026 - 14:15
दंगाईयो और आतंकवादीयो के खिलाफ़ क़ुम अल मुक़द्देसा मे एतिहासिक रैली का आरम्भ / रैली मे ग़ैर ईरानी छात्रो की भरपूर भागीदारी

हौज़ा / इस एतिहासिक रैली का आरम्भ जेहाद स्कावर से हुआ जहा क़ुम अल मुक़द्देसा की क्रांतिकारी जनता के साथ साथ ग़ैर ईरानी छात्रो ने भी भरपूर भाग लेते हुए ईरान मे जारी दुशमन की आतंकवादी कार्रवाईयो के खिलाफ़ विरोधी आवाज़ बुलंद की और दुश्मन के तत्वो को कीफर किरदार तक पहुचाने की मांग की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस एतिहासिक रैली का आरम्भ जेहाद स्कावर से हुआ जहा क़ुम अल मुक़द्देसा की क्रांतिकारी जनता के साथ साथ ग़ैर ईरानी छात्रो ने भी भरपूर भाग लेते हुए ईरान मे जारी दुशमन की आतंकवादी कार्रवाईयो के खिलाफ़ विरोधी आवाज़ बुलंद की और दुश्मन के तत्वो को कीफर किरदार तक पहुचाने की मांग की।

यह रैली 19 दय रोड से होती हुई हज़रत मासूमा (स) के हरम तक जार समाप्त हुई।

रैली का उद्देश्य उन दुशमन के किराए के टट्टूओ, आतंकवादी समूहो और दंगाईयो से घृणा व्यक्त करना है जिन्होने बीते दिनो ईरान मे कई आतंकवादी कार्रवाइयो मे कई लोगो और पुलिस कर्मी को शहीद किया और सेकड़ो लोगो को ज़ख्मी किया और ईरान की इस्लामी प्रणाली को दाग़दार करना चाहा।

इस भव्य रैली का आरम्भ स्थानीय समय के अनुसार 2 बजे हुआ जहा लोगो ने एकत्रित होकर हरम की ओर क़दम बढ़ाते हुए इजराइल और अमेरिका षडयंत्र को विफ़ल बनाया और एक बार फिर दुश्मन की पराजय को यकीनी बना दिया। 

विरोधी जुलूस मे जैसे जैसे समय गुज़र रहा है वैसे वैसे लोगो की संख्या मे वृद्धि हो रही है, जुलूस का इस सख्ंया मे शरीक होना खुद दुशमन के मुहं पर थप्पड है कि लोग आज भी क्रांति और सुप्रीम लीडर के वफ़ादार है और रहेंगे और दुशमन अपने उद्देशय मे कभी भी सफल नही हो सकता।

इस भव्य रैली मे जनता सुप्रीम लीडर से अपनी वफ़ादारी को दोहराते हुए लब्बैक या ख़ामेनई, हयहात मिन्नज़ ज़िल्ला, हुसैन हुसैन शेआर मा अस्त शहादत इफ़्तेखारे मा अस्त, दंगाईयो पर लानत, देशद्रोहीयो पर लानत, मुनाफ़िक़ पर लानत, अमेरिका मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद, विलायत फ़क़ीह के मुखालिफ पर लानत जैसे नारे लग रहे है और आंतकवादी समूहो और दंगाईयो से अपनी घृणा व्यक्त कर रहे है।

इस भव्य और एतिहासिक रैली मे हर आयु के लोग सम्मिलित है, बच्चे, युवा और वृद्ध सब के हाथो मे ईरान का पवित्र झंडा मौजूद है और इस बात का सबूत है कि आज भी सम्मानित और शराफ़त मंदाना जीवन गुजारने के लिए क्रांति के मार्ग पर अग्रसर रहना ज़रूरी है।

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