हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मरहूम आयतुल्लाह आगा मुज्तबा तेहरानी ने अपने एक नैतिक बैठक मे रजब के अंतिम दिनो के हवाले से कुछ निर्देश दिए जोकि हम अपने प्रिय पाठको की सेवा मे प्रस्तुत कर रहे है।
रिवायतो मे रजब को शहरुल्लाहिल अकबर अर्था अल्लाह का सबसे बड़ा महीना कहा गया है। पैगम्बर अकरम (स) फ़रमाते हैः रजब अल्लाह का महीना है, शाबान मेरा महीना है, और रमज़ान मेरी उम्मत का महीना है।
इसी प्रकार रिवायतो मे रजब को असब्ब भी कहा गया है, इसलिए के इस महीने मे अल्लाह की रहमत अपनी उम्मत पर बहुत अधिक बरसती है। इस महीने मे इलाही मगफ़ेरत का विशेष नुज़ूल होता है, यही रजब की विशेषता है।
सभी महीनो मे रजब वह महीना है जिसमे हाजात पूरी होती है, यह केवल इस्लाम की बात नही है बल्कि अज्ञानता के दौर मे भी अक़ीदा था कि रजब हाजातो के पूरे होने का महीना है।
रजब का महीना हर दौर मे इतना ही क़द्र और मंजिलत का हामिल रहा है। इस महीने अल्लाह के औलिया ने अल्लाह से अपना संबंध मजबूत किया, लेकिन हमने क्या किया ? हमे दुआ करनी चाहिए कि हे अल्लाह हमे अपने औलिया की विशष ध्यान मे रख अर्थात उन लोगो के माध्य से जिन्होने तुझ तक रसाई हासिल की है, हमे अपने खालिस लुत्फ़ की छत्र छाया मे रख।
हमे अपनी रहमतो और मगफ़िरत से वंचित मत कर जो तूने इस महीने अपने औलिया को प्रदान की है। अतः इस महीने के हर क्षण की क़द्रदानी जरूरी है। हमे अल्लाह से मग़फ़ेरत, हिदायत और अपनी तमाम हाजते मांगनी चाहिए।
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