शुक्रवार 23 जनवरी 2026 - 10:59
इस पुत्र का नाम हारून (अ) के पुत्र के नाम पर रखें

हौज़ा / जब हज़रत अबा अब्दिल्लाहिल हुसैन (अ) का नाम रखा जा रहा था, जिब्राईल अमीन नाज़िल हुए और कहाः ऐ मोहम्मद (स) अल्लाह तआला आपको सलाम कहता है और फ़रमाता हैः अली आपके लिए वही स्थान रखते है जो हारून ने मूसा के लिए रखा था। इसलिए अपने इस पुत्र का नाम हारून के पुत्र के नाम पर रखें। रसूल अल्लाह (स) ने पूछाः हारून के पुत्र का नाम क्या था जिब्राईल ने उत्तर दिया शब्बीर फ़िर रसूल अल्लाह (स) ने फ़रमाया मेरी भाषा अरबी है इस पर जिब्राईल ने कहा फ़िर इसका नाम हुसैन रखें (जोकि शब्बीर का अरबी पर्चायवाची है)

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, उस्मा बिंते उमैस रावी है जब इमाम हुसैन (अ) का जन्म हुआ और रसूल अल्लाह को सूचना मिली तो आप पधारे और कहाः अस्मा मेरे पुत्र को मुझे दे दो मैने बच्चे को सफ़ेद कपड़े मे लपेट कर आपकी खिदमत मे पेश किया। रसूल अल्लाह ने दाहिनी कान मे अज़ान दी और बाए कान मे अक़ामत कही फ़िर आपकी आंखो मे आसू भर आए और आप रोने लगे। मैने पूछा मेरे माता पिता आपको क़ुर्बान जाए रोने का क्या कारण है। फ़रमाया इस मेरे पुत्र के कारण, पूछा अभी तू यह नवजात है, खुशी का अवसर है रोना क्यो फ़रमाया मेरे बाद एक समूह अत्याचार करके इसे शहीद करेगा, और मै क़यामत मे उस समूह की सिफ़ारिश नही करूंगा, फिर फ़रमाया अभी यह बात फ़ातेमा को ना बताना।

उसके बाद आप (स) ने हज़रत अली (अ) से पूछाः या अली तुमने अपने पुत्र का क्या नाम रखा है हज़रत अली (अ) ने कहा मै अल्लाह के रसूल से पहले नाम रखने का साहस नही कर सकता, नबी अकरम (स) ने फ़रमायाः मै भी अपने पालनहार से पहले नाम रखने का साहस नही कर सकता।

उसी समय जिब्राईल (अ) नाज़िल हुए और कहाः ऐ मोहम्मद (स) अल्लाह तआला आपको सलाम कहता है और फ़रमाता हैः अली आपके लिए वही स्थान रखते है जो हारून ने मूसा के लिए रखा था। इसलिए अपने इस पुत्र का नाम हारून के पुत्र के नाम पर रखें। रसूल अल्लाह (स) ने पूछाः हारून के पुत्र का नाम क्या था जिब्राईल ने उत्तर दिया शब्बीर फ़िर रसूल अल्लाह (स) ने फ़रमाया मेरी भाषा अरबी है इस पर जिब्राईल ने कहा फ़िर इसका नाम हुसैन रखें ।

अतः रसूल अल्लाह (स) ने बच्चे का नाम हुसैन रखा और उसकी ओर से अक़ीक़े मे एक महंगा दुंबा जिब़्हा किया।

हुसैनी स्कूल के कुछ सीख

अम्रबिल मारूफ़ और नही अनिल मुंकर, ज़ुल्म और जाबेराना सरकार के खिलाफ जिद्दो जहद और विचलन से सामान, यह वह महत्वपूर्ण सीख है जो इमाम हुसैन (अ) से सीखी जा सकती है, लेकिन उनकी बातो और जीवनशैली से हमे जाती सुधार और अच्छा जीवन बिताने का तरीक़े भी मिलते है। इसीलिए ज़रूरी है कि अहले क़लम बुद्धिजीवी और अनमोल कथन की समीक्षा करे जो इमाम (अ) ने छोड़े है, ताकि इनसे जीवन और समाज का सुधार का सामान हासिल किया जा सकें।

इमाम हुसैन (अ) का एक फूल का उपहार का जवाब 

1- एक दिन एक दासी ने इमाम हुसैन को फ़ूल की एक डाली उपहार के रूप मे पेश की। इमाम उपहार स्वीकार करते हुए कहा तुम अल्लाह के मार्ग मे आज़ाद हो।

अनस बिन मालिक रसूल अल्लाह (स) का सेवक बयान करता है मैने पूछा उस दासी ने आपको केवल एक फूल की डाली (जिसका कोई मूल्य नही है) पेश की है, और आपने उस के बदले मे उसे आज़ाद कर दिया।

इमाम ने कहा अल्लाह तआला ने हमे यही अदब सिखाया है जब तुम्हे कोई उपहार दे तो तुम भी उसे बदले मे कोई अच्छा उपहार दो या कम से कम उसी के बराबर  (सूर ए नेसा, 86)

इमाम हुसैन (अ) ने अनस को यह सीख दी कि उपहार की क़द्र राशि या क्वांटिटी से नही, बल्कि खुलूस नियत और देने वाले के अखलाक़ से होती है।

2- बीमार की तीमारदारी और उसके ऋण की अदाएगी

एक दिन इमाम हुसैन (अ) उसामा बिन ज़ैद की तीमारदारी के लिए पधारे जो बीमार थे। उपने उन्हे ग़मग़ीन पाया फ़रमाया तुम क्यो ग़मगीन है उन्होने कहा मेरे साथ हज़ार दिरहम का कर्ज़ है इमाम ने फ़रमाया यह कर्ज़ मेरी ज़िम्मेदारी है। उसामा ने कहा मुझे डर है कि मै इसकी अदाएगी से पहले मर जाऊंगा। आपने फ़रमाया तुम उस समय तक नही मरोगे जब तक मै यह कर्ज़ अदा नही कर दूं अतः इमाम ने उनकी वफ़ात से पहले ही उनका सारा कर्ज़ अदा कर दिया।

3- पापो से बचने के महत्वपूर्ण सिद्धांत

एक व्यक्ति इमाम हुसैन (अ) की सेवा मे उपस्थित हुआ और कहा मै एक पापी व्यक्ति हूं और अपने आप को पाप से नही रोक पाता मुझे कोई नसीहत करें। इमाम हुसैन ने कहाः पांच बातो पर अमल करो फिर जो चाहे पाप कर लेना

1- अल्लाह के रिज़्क को छोड़ दो फिर जो चाहे पाप कर ल

(अर्थात अगर तुम अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ से बे नियाज़ हो सकते हो तो फिर पाप कर लो)

2- अल्लाह की ममलेकत से बाहर चले जाओ, फिर जो चाहे पाप कर लो (अर्थात अगर तुम अल्लाह की हुकूमत से बाहर निकल सकते है तो ...)

3-  ऐसा स्थान ढूंड लो जहा अल्लाह तुम्हे ना देखे फिर जो चाहे पाप कर लो

4- जब मल्कुल मौत तुम्हारी रूह क़ब्ज़ करने आए उसे रोक दो, अपनी रूह न जाने दो, फिर जो चाहे पाप कर लो (अर्थात अगर मौत को रोक सको तो फिर ...)

5- क़यामत के दिन जब जहन्नम का मालिक तुम्हे जहन्नम मे डालने आए तो अगर ताकत रखते हो अंदर मत जाना, तब तुम जो चाहे पाप कर सकते है

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