बुधवार 28 जनवरी 2026 - 15:39
सह़ीफ़ा-ए-सज्जादिया जीवन का पूर्ण दर्पण है

हौज़ा / उस्ताद हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम ने सह़ीफ़ा-ए-सज्जादिया की हमागीर हैसियत की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि यह नूरानी किताब ज़िंदगी के तमाम पहलुओं की अक्कासी करती है और इंसानी हयात के हर शोबे को अपने दामन में समेटे हुए है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद रज़ा फ़ुवादियान ने मस्जिद-ए-मुक़द्दस जमकरान के इजलास हॉल में “सह़ीफ़ा: किताब-ए-ईमान व मुक़ावमत” के मौज़ू पर मुनअक़िद होने वाली आठवीं इल्मी नशिस्त से ख़िताब करते हुए कहा कि हक़ व बातिल का निज़ाम आग़ाज़-ए-आफ़रीनश से क़ायम है।

इसी तनाज़ुर में इमाम ज़ैनुल आबिदीन हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने दुआ-ए-पंजुम में इस हक़ीक़त की तरफ़ इशारा फ़रमाया है और मुस्तकबिरीन के मुक़ाबले में अल्लाह तआला से मदद तलब की है।

उन्होंने मज़ीद कहा कि इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम इरशाद फ़रमाते हैं जो शख़्स अल्लाह तआला पर तवक्कुल करता है, अल्लाह उसे निजात अता फ़रमाता है, और यह एक नाक़ाबिल-ए-इन्कार हक़ीक़त है।

उस्ताद ए हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम ने इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम के दौर-ए-इमामत का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम की इमामत के मुश्किल-तरीन अदवार में से एक था। चुनांचे इमाम अलैहिस्सलाम ने अपनी दुआओं ख़ुसूसन दुआ-ए-दुव्वुम, चहारुम और सत्ताईसवीं में इस सख़्त दौर के हालात की तरफ़ इशारा फ़रमाया है।

उन्होंने सह़ीफ़ा-ए-सज्जादिया की दुआओं की तौज़ीह करते हुए कहा कि दुआ-ए-हश्तुम में समाजी आफ़ात व ख़राबियों का ज़िक्र मिलता है, जबकि सबसे ज़्यादा सियासी मफ़हूम रखने वाली दुआ, दुआ-ए-बीसवीं है, जिसकी तरफ़ रहबर-ए-मुअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब कई मर्तबा तवज्जो दिला चुके हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन फ़ुवादियान ने कहा कि इस दुआ में इस्तिक़ामत और मुक़ावमत के ऐसे मज़ामीन पाए जाते हैं जो बज़ात-ए-ख़ुद एक मुकम्मल दर्स और मक्तब की हैसियत रखते हैं।

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