हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रफ़ीई ने अपने बयान में कहा,यूरोपीय यूनियन का यह दुश्मनाना क़दम कि संयुक्त राष्ट्र के एक रुक्न मुल्क की क़ानूनी और रस्मी मुसल्लह अफ़राज़ का हिस्सा होने वाली सिपाह-ए-पासदारान-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी को “आतंकी तंज़ीम” का उनवान दिया जाए, न सिर्फ़ किसी भी क़ानूनी बुनियाद से महरूम है, बल्कि बैनुलअक़वामी क़ानूनी निज़ाम के बुनियादी उसूलों से खुला तआदुम रखता है।
सिपाह-ए-पासदारान दुनिया का सबसे ज़्यादा आतंकवाद-विरोधी सैन्य संगठन है। इसके बहादुर योद्धाओं ने राष्ट्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना खून बहाया और आईएसआईएस तथा अन्य आतंकवादी गुटों को करारी शिकस्त दी।
यह वही आईएसआईएस और गुट हैं जिनके बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति और पश्चिमी नेताओं ने स्वीकार किया है कि वे आतंकवाद को पनपाने वाली अमेरिकी सरकार द्वारा पैदा किए गए और समर्थित थे।
यह शत्रुतापूर्ण कार्रवाई ईरान की इस्लामी जनता और इस मातृभूमि के रक्षकों पर अधिकतम दबाव डालने के उद्देश्य से है। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि ईश्वर की मदद से, पैगंबर मुहम्मद के शुद्ध इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करते हुए और इमाम खामेनेई के नेतृत्व में, यह सम्मानित राष्ट्र केवल ईश्वर के सामने झुकता है, किसी और के सामने नहीं, और प्रगति के शिखर तक पहुँचने तक अपने रास्ते पर चलता रहेगा।
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