शुक्रवार 30 जनवरी 2026 - 17:53
मिल्लत-ए-ईरान दुश्मनों की धमकियों और दबावों के सामने हरगिज़ सर नहीं झुकेगी।हुज्जतुल इस्लाम दरख़्शान

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम दरख़्शान ने कहा, सिपाह-ए-पासदारान को आतंकवादी क़रार देना एक दुश्मनाना क़दम है और किसी भी तरह की मंतक़ी बुनियाद से ख़ाली है। मिल्लत-ए-ईरान दुश्मनों की धमकियों और दबावों के सामने कभी भी तस्लीम नहीं होगी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम सैयद बाक़िर दरख़्शान ने नमाज़ ए जुमआ फ़ीन के पहले ख़ुत्बे में नमाज़ियों को तक़वा-ए-इलाही और गुनाहों से परहेज़ की नसीहत करते हुए हज़रत वली-ए-अस्र अज. की विलादत-ए-बासआदत पर मुबारकबाद पेश की और इमाम ज़माना (अज.) को याद किया।

इमाम ए जुमआ फ़ीन ने कहा,ईमानदार जवानों को चाहिए कि हज़रत अली अकबर (अ.) को अपना नमूना-ए-अमल बनाएँ, क्योंकि जवानी का दौर नश्वो-नुमा, तकामुल और ख़ुदसाज़ी के लिए एक क़ीमती मौक़ा है।

हुज्जतुल इस्लाम दरख़्शान ने कहा,ईरानी जवान ने दौर-ए-दिफ़ाअ-ए-मुक़द्दस में ईसार और शुजाअत के साथ मैदान में क़दम रखा और आज भी अहले-बैत (अ.) के हरम की हिफ़ाज़त में बल्कि हालिया 12 रोज़ा थोपे गए जंग में भी, अपनी बहादुरी और मुज़ाहमत की रूह को नुमायाँ किया है।

उन्होंने दह-ए-फ़ज्र का हज़रत बक़ीयतुल्लाह (अज.) की विलादत से हम-ज़मानी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, यह हम-ज़मानी इस्लामी निज़ाम और ईरान की इंक़िलाबी मिल्लत के लिए एक क़ीमती मौक़ा और इलाही तौफ़ीक़ है।

इमाम ए जुमआ फ़ीन ने मुसल्लह अफ़राज़ की हर-जिहत हिमायत की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा,अवाम की जानिब से मुल्की निज़ामी और अम्नी अफ़राज़ की पुश्तपनाही ने हमेशा दुश्मनों की साज़िशों और दुश्मनाना मंसूबों को नाकाम बनाया है।
उन्होंने सिपाह ए पासदारान-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी को इंक़िलाब से जन्मी हुई इदारा और शोहदा के ख़ून की हिफ़ाज़त करने वाला क़रार देते हुए कहा, सिपाह ने सख़्त से सख़्त हालात में ईरान-ए-इस्लामी की अम्नियत और तमामियत की दिफ़ाअ की है।

दुश्मनों के दबाव और हमले इस इदारे को कमज़ोर नहीं करते बल्कि इंक़िलाब के अरमानों की हिफ़ाज़त के लिए इसके अज़्म को और मज़बूत करते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम दरख़्शान ने ज़ोर देकर कहा, सिपाह-ए-पासदारान को आतंकवादी क़रार देना एक दुश्मनाना अमल है और किसी भी तरह की मंतक़ी बुनियाद से ख़ाली है। मिल्लत-ए-ईरान दुश्मनों की धमकियों और दबावों के सामने हरगिज़ तस्लीम नहीं होगी।

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