हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , अज़रबाइजान में आर्मेनी ईसाइयों के आर्च बिशप और ख़लीफ़ा-ए-कुल, ग्रीवर चीफ्तचियान ने कहा है कि मुन्जी-ए-मौऊद के ज़ुहूर का इंतज़ार तमाम तौहीदी मज़ाहिब के दरमियान वहदत का बुनियादी मरकज़ है, और इस अकीदे से दूरी समाजों में संगीन ग़लतियों, तनाज़ात और बदअमनी का सबब बनती है, जिसकी मिसालें आज की दुनिया में वाज़ेह तौर पर देखी जा सकती हैं।
उन्होंने हौज़ा न्यूज़ से ख़ुसूसी गुफ़्तगू में तौहीदी मज़ाहिब में मुन्जी के मुश्तरका तसव्वुर की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि समाजों को ज़वाल से बचाने में अकीदा-ए-इंतज़ार का किरदार निहायत अहम है।
आर्च बिशप ग्रीवर चीफ्तचियान ने कहा कि मुन्जी के इंतज़ार का तसव्वुर इस्लाम, यहूदियत और ईसाइयत समेत तमाम तौहीदी मज़ाहिब में मुश्तरक है। अगरचे दूसरे मज़ाहिब में भी इस तरह का तसव्वुर पाया जाता है, लेकिन वह ज़्यादातर अख़लाक़ी उसूलों पर क़ायम होते हैं। ऐसे समाज जिनमें मुन्जी के इंतज़ार का तसव्वुर मौजूद नहीं होता, वहाँ झगड़े, जंगें, टकराव और मुख़्तलिफ़ रूहानी व नफ़्सियाती बीमारियाँ जन्म लेती हैं।
उन्होंने हुक्मरानों से उम्मीद और ख़ुदा से उम्मीद के दरमियान फ़र्क़ बयान करते हुए कहा कि दुनिया के हुक्मरानों से हमारी तवक़्क़ोआत, ख़ुदावंद-ए-वाहिद से हमारी उम्मीदों से बिलकुल मुख़्तलिफ़ होती हैं। हुक्मरान ग़लतियाँ कर सकते हैं, लेकिन ख़ुदा से जो उम्मीद रखी जाती है, वह बेमिसाल और पाक होती है।
उन्होंने सियासत पर इस अकीदे के असरात पर गुफ़्तगू करते हुए कहा कि अगर तौहीदी मज़ाहिब के पैरोकार सियासतदान इस इंतज़ार के तसव्वुर से दूर हो जाएँ, तो उनसे और भी संगीन ग़लतियाँ सरज़द होती हैं। तजुर्बा और तारीख़ गवाह है कि जब हुक्मरानों ने ख़ुदा पर कामिल ईमान रखते हुए मुन्जी के ज़ुहूर के अकीदे को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाया, तो इंसानी समाज ज़्यादा मुत्तहिद और मुनज़्ज़म रहा।
आख़िर में आर्च बिशप ने तमाम मज़ाहिब के पैरोकारों की बुनियादी ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि सबसे अहम फ़र्ज़ यह है कि मुन्जी के ज़ुहूर पर ईमान और उम्मीद को कभी कमज़ोर न होने दिया जाए। जब ईमान और उम्मीद ख़त्म हो जाती है, तो समाज अख़लाक़ी ज़वाल का शिकार हो जाता है। तमाम अदियान की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यही है कि अपने मानने वालों में ईमान और उम्मीद को ज़िंदा रखें और आख़िरी दम तक इसकी हिफ़ाज़त करें।
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