हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन उजाक नेज़ाद ने निमा ए-शाबान की मुनासबत से जारी अपने पैग़ाम में इस दिन को “उम्मीद, इंतिज़ार और इंसानियत के रौशन मुस्तक़बिल की अज़ीम ईद” क़रार देते हुए कहा कि निमे-ए-शाबान इलाही वादा-ए-अदल, इंसाफ़ और इंसानी करामत की तकमील का दिन है।
उन्होंने इस्लामी इन्क़िलाब की मेंहदवी नौइयत की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि हज़रत इमाम ख़ुमैनी (रह.) की क़ियादत में इस्लामी इन्क़िलाब, दौर-ए-ग़ैबत में फ़आल और बेदार इंतिज़ार का अमली नमूना था, जिसने दीन की अहया, इस्तिक़बार के ख़िलाफ़ मुज़ाहमत और नए इस्लामी तमद्दुन की बुनियाद रखने में अहम किरदार अदा किया।
मुतवल्ली मस्जिद ए जमकरान ने कहा कि यह मुक़द्दस मक़ाम हज़रत वली-ए-अस्र (अज) के आशिक़ों और मुन्तज़िरीन का मरकज़ है, और हर साल निमे-ए-शाबान के मौक़े पर यहां इस्लामी इन्क़िलाब के बाद सबसे बड़ा महदवी इज्तिमा मुनअक़िद होता है, जो मिल्लत-ए-ईरान की एतेक़ादी क़ुव्वत और महदवी व इन्क़िलाबी पहचान का अमली मज़हर है।
उन्होंने इन मुबारक अय्याम की मुबारकबाद पेश करते हुए अवाम, शोहदा के ख़ानदानों, नौजवानों, दानिश्वरों और मज़हबी अंजुमनों से अपील की कि वे 14 और 15 शाबान को मस्जिद जमकरान में मुनअक़िद होने वाले अज़ीम जश्न और इज्तिमा में भरपूर शिरकत करें।
इस इज्तिमा का शिआर “मेहदी, जान-ए-ईरान” रखा गया है, जिसके ज़रिए ईमान, उम्मीद, वहदत और ज़ुहूर के लिए आमादगी का अमली इज़हार किया जाएगा।
आख़िर में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन उजाक-नज़ाद ने ज़ोर देकर कहा कि यह अज़ीम इज्तिमा आलम-ए-इस्लाम और दुनिया के तमाम मज़लूमों के लिए एक वाज़ेह पैग़ाम होगा, जो इस्तिक़ामत, बाख़बर इंतिज़ार, उम्मीद और मुनज्जी-ए-मौऊद (अज) की क़ियादत में रौशन मुस्तक़बिल पर ईमान की अलामत है।
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