हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस्लामाबाद में अल्लामा सैयद हुसनैन अब्बास गर्देज़ी ने इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर जारी अपने बयान में इन ख़यालात का इज़हार किया।
उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में ईरान ने जिस इस्तिक़ामत, ख़ुदमुख्तारी और साइंसी व दिफ़ाई तरक़्क़ी का मुज़ाहिरा किया है, वह दुनिया के लिए साफ़ पैग़ाम है कि जो क़ौम ख़ुदा पर भरोसा और अपने नज़रिये पर यक़ीन रखती हो, उसे कोई ताक़त शिकस्त नहीं दे सकती।
आज इस्लामी ईरान न सिर्फ़ अपने इलाक़े में बल्कि आलमी सतह पर एक असरदार और ख़ुददार ताक़त के तौर पर सामने आया है, जो मज़लूमों की हिमायत और ज़ालिम निज़ामों के मुक़ाबले में डटकर खड़े होने की अलामत बन चुका है।
यह सब इंक़िलाब-ए-इस्लामी की बरकात, शोहदा के ख़ून और इमाम ख़ुमैनी (रह.) की बसीरत भरी क़ियादत का नतीजा है।
उन्होंने अज़ीम रहबर-ए-इंक़िलाब हज़रत इमाम ख़ुमैनी (रह.) को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि उन्होंने इस्लाम को सिर्फ़ मस्जिद तक महदूद नहीं रखा, बल्कि उसे एक ज़िंदा इंक़िलाबी निज़ाम के रूप में दुनिया के सामने पेश किया।
इसी तरह उन्होंने मौजूदा रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़िलाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई की बसीरत, शुजाअत और आलमी क़ियादत को सलाम पेश किया, जिनकी हिकमत और इस्तिक़ामत ने तमाम तूफ़ानों के बावजूद इंक़िलाब को सरबलंद रखा है।
आख़िर में उन्होंने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह रहबर-ए-मुअज़्ज़म को लंबी उम्र अता फ़रमाए, इस्लामी ईरान को हर मैदान में मज़ीद कामयाबियाँ दे और इस इंक़िलाब को इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) के ज़ुहूर और आलमी अद्ल के इंक़िलाब से मिला दे।
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