गुरुवार 29 जनवरी 2026 - 23:03
रहबर-ए-मुअज़्ज़म सिर्फ़ ईरान के नहीं, बल्कि आलमे इस्लाम और दुनिया के मज़लूमों के हक़ीक़ी रहबर हैं।मौलाना सैयद अबुल क़ासिम रिज़वी

हौज़ा / अध्यक्ष शिया उलेमा काउंसिल व मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के इमामे जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद अबुल क़ासिम रिज़वी ने कहा है कि रहबर ए मुअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी सिर्फ़ ईरान की क़ौम के क़ायद नहीं हैं, बल्कि पूरे आलमे इस्लाम के रहबर, दुनिया भर के मज़लूमों की उम्मीद और उनके हक़ों के सच्चे हिफ़ाज़त करने वाले हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,अध्यक्ष शिया उलेमा काउंसिल व मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के इमामे जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद अबुल क़ासिम रिज़वी ने एक तफ़सीली बयान में रहबर-ए-मुअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी की शख़्सियत और क़ियादत को ख़िराज-ए-तहसीन पेश करते हुए कहा कि अल्लाह तआला रहबर-ए-मुअज़्ज़म को अपनी हिफ़ाज़त में रखे।उन्होंने कहा कि रहबर ए मुअज़्ज़म ऐसे शेर हैं जो धमाकों से नहीं डरते, इसलिए दुश्मनों की धमकियाँ उन्हें डराने में नाकाम हैं।

उन्होंने कहा कि ज़ालिम यह हक़ीक़त भूल रहा है कि जब शेर ज़ख़्मी होता है तो वह पहले से ज़्यादा ख़तरनाक हो जाता है। शहीदों की क़ुर्बानियों ने ईरानी क़ौम को कमज़ोर नहीं किया, बल्कि उसे और ज़्यादा ताक़त, हौसला और इरादा दिया है।उनके मुताबिक़, रहबर-ए-मुअज़्ज़म की क़ियादत आज के दौर में बहादुरी, सब्र, फ़तह और नुसरत की ज़िंदा मिसाल है।

मौलाना सैयद अबुल क़ासिम रिज़वी ने अपने हालिया ईरान के दौरे का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस बार भी ईरान का सफ़र बहुत यादगार रहा। तेहरान हो या क़ुम, जमकरान हो या मशहद, हर जगह ज़िंदगी पूरी तरह चलती हुई नज़र आई। क़ुम और मशहद के मुक़द्दस मज़ार ज़ायरीन और नमाज़ियों से भरे हुए थे, और शहादत-ए-इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के मौक़े पर इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम के रौज़े का सहन अज़ादारों से भरा हुआ था।

उन्होंने कहा कि शब-ए-मेअराज और रोज़-ए-मेअराज की रूहानी रौनक़ें कभी न भूलने वाली थीं। बर्फ़बारी, बारिश और सर्द हवाओं के बावजूद ज़ायरीन की बड़ी तादाद इस बात का साफ़ सबूत थी कि अवाम की ज़िंदगी पूरी ताक़त के साथ जारी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ मीडिया जो तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह ज़मीनी हक़ीक़त से बिल्कुल अलग है।

मौलाना सैयद अबुल क़ासिम रिज़वी ने कहा कि ईरान में एयरपोर्ट, ट्रेन सर्विस, रेलवे स्टेशन, दुकानें, रेस्टोरेंट और बाज़ार सब आम दिनों की तरह खुले और काम करते हुए नज़र आए अफ़सोस की बात है कि मीडिया की आँखें बंद हैं। अगर वे ख़ुद ईरान आकर देखते, तो सच देख भी लेते और सुन भी लेते।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब मीडिया के लिए ज़रूरी है कि वह अपनी साख़ को ठीक करे, क्योंकि आज दुनिया में जिस तेज़ी से करप्शन बढ़ रहा है, उसमें सबसे बड़ा हाथ बदनाम और ग़लत मीडिया का है।

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