बुधवार 11 फ़रवरी 2026 - 10:01
ईरान की इस्लामी क्रांति सिर्फ़ राजनीतिक परिवर्तन नहीं बल्कि चौतरफा वैचारिक और समाजी क्रांति हैः मौलाना आरिफ़ हुसैन आज़मी

हौज़ा / मौलाना आरिफ़ हुसैन आज़मी ने इंक़ेलाब-ए-इस्लामी ईरान की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर इमाम ख़ुमैनी (र.अ.) की क़ियादत, शोहदा की कुर्बानियों और ईरानी अवाम के अज़्म व इस्तेक़लाल को ख़िराज-ए-तहसीन पेश करते हुए कहा कि यह इंक़ेलाब महज़ सियासी तब्दीली नहीं बल्कि एक हमागीर फ़िक्री व समाजी तहरीक है, जिसने दुनिया भर के मज़लूमों को हुर्रियत और ख़ुद्दारी का पैग़ाम दिया हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , नई दिल्ली/ इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर नई दिल्ली में मुक़ीम हुज्जतुल इस्लाम मौलाना आरिफ़ हुसैन आज़मी ने अपने पैग़ाम में इमाम ख़ुमैनी (र.अ.) की क़ियादत, शोहदा की कुर्बानियों और ईरानी अवाम के अज़्म व इस्तेक़लाल को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया हैं।

उन्होंने कहा कि 11 फ़रवरी 1979 को बरपा होने वाला इंक़ेलाब सिर्फ़ एक सियासी तब्दीली नहीं था, बल्कि एक हमागीर फ़िक्री, अख़लाक़ी, समाजी और तहज़ीबी इंक़िलाब था, जिसने ताग़ूती निज़ाम और सामराजी तसल्लुत के ख़िलाफ़ जद्दोजहद कर के दुनिया भर के मज़लूम इंसानों को हुर्रियत और ख़ुद्दारी का पैग़ाम दिया हैं।

उनके मुताबिक यह इंक़िलाब क़ुरआन व सुन्नत की तालीमात और अहले बैत (अ.) की सीरत पर मबनी ऐसे निज़ाम की बुनियाद बना, जिसका मक़सद अद्ल-ए-इज्तिमाई, इंसानी वक़ार और समाजी इंसाफ़ का क़ियाम है।

मौलाना आज़मी ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी (र.अ.) ने “ना मशरिक़, ना मग़रिब, फ़क़त इस्लामी जम्हूरिया” के नारे के तहत ऐसी तहरीक की क़ियादत की, जिसने आलमी इस्तिकबार को चैलेंज किया और मुसलमानों में दीनी हमीयत, ख़ुद-एतमादी और सियासी शऊर को बेदार किया। उन्होंने मज़ीद कहा कि ईरानी अवाम ने बेमिसाल कुर्बानियों और साबितक़दमी के ज़रिये इस तहरीक को कामयाब बनाया और दुनिया को इत्तेहाद व इस्तिक़ामत की अमली मिसाल दिखाई।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इंक़िलाब के 47 बरस बाद भी ईरान ने रहबर-ए-मुअज्ज़म आयतुल्लाहिल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई की क़ियादत में साइंसी, तिब्बी, दिफ़ाई, सनअती और तालीमी मैदानों में नुमायां तरक़्क़ी हासिल की है और आलमी पाबंदियों के बावजूद ख़ुदकफ़ालत की मिसाल क़ायम की है।

मौलाना आज़मी के मुताबिक इंक़ेलाब ए इस्लामी ईरान ने फ़िलिस्तीन समेत दुनिया भर के मज़लूम अवाम की हिमायत कर के वाज़ेह किया है कि यह तहरीक आलमी सतह पर हक़ व इंसाफ़ और इंसानी वक़ार के तहफ़्फ़ुज़ की अलामत है।

आख़िर में उन्होंने मिल्लत-ए-ईरान, रहबर-ए-इंक़िलाब और तमाम आज़ादी-पसंद अक़वाम को इस मौक़े पर मुबारकबाद पेश करते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला इस इंक़िलाब को क़ायम व दायम रखे और उम्मत-ए-मुस्लिमह को इत्तेहाद, बेदारी और इस्तिक़ामत अता फ़रमाए।

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