हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,रहबर-ए-मुअज़्ज़म ने 22 बहमन के मौक़े पर मुल्क भर में मुनअक़िद होने वाले अज़ीम अवामी इज्तिमा को इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान की इज़्ज़त, ताक़त और सरबलंदी का मज़हर क़रार देते हुए ईरानी क़ौम का शुक्रिया अदा किया है और क़ौमी इत्तेहाद को बरक़रार रखने की ताकीद की है।
रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़िलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामनई ने अपने टेलीविज़न पैग़ाम में मिल्लत-ए-ईरान से ख़िताब करते हुए फ़रमाया कि आप ने इस साल 22 बहमन के दिन एक अज़ीम कारनामा अंजाम दिया। आप ने ईरान को सरफ़राज़ किया और हमेशा की तरह इस्लामी जम्हूरिया की हिमायत करते हुए उसकी ताक़त में इज़ाफ़ा किया।
रहबर-ए-इंक़िलाब ने फ़रमाया कि वह दुश्मन जो अपनी तक़रीरों और मंसूबाबंदी में ईरानी क़ौम को झुकाने और तस्लीम कराने के दरपे थे, अवाम की इस शानदार और पुरजोष शिरकत से मायूस हो गए। उन्होंने इस अज़ीम अवामी तहरीक का अज्र ईरान की मज़ीद इज़्ज़त, बढ़ती हुई क़ुव्वत और मुकम्मल ख़ुदमुख्तारी को क़रार दिया।
आयतुल्लाहिल-उज़्मा ख़ामनई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुल्क भर में सड़कों पर निकल कर एक ही नारा और एक ही मौक़िफ़ के साथ अपनी क़ौमी शनाख़्त और शख़्सियत का इज़्हार करने वाली क़ौम क़ाबिल-ए-तहसीन है। उन्होंने फ़रमाया कि यह मिली एकजहती और बाहमी इत्तिसाल निहायत क़ीमती सरमाया है जिसकी हिफ़ाज़त सब की ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि हम सब को चाहिए कि इस क़ीमती क़ौमी इत्तेहाद को महफ़ूज़ रखने की कोशिश करें, क्योंकि यही इत्तेहाद ईरान की ताक़त और इस्तेहकाम का सरचश्मा है।
रहबर-ए-इंक़िलाब ने मुल्क के कोने-कोने में मुनअक़िद होने वाले इस अज़ीम इज्तिमा में शरीक तमाम अफ़राद का फ़र्दन फ़र्दन शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें सलाम और दुरूद पेश किया और इस तारीखी शिरकत को दुश्मनों के मुक़ाबले में क़ौम की बेदारी और इस्तेक़ामत की अलामत क़रार दिया।
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