हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई ने “पाप करने वाले इंसान को अम्र बिल मारूफ़” विषय पर एक सवाल का जवाब दिया है, जो पढ़ने वालों के लिए पेश किया जा रहा है।
सवाल: क्या कोई ऐसा इंसान जो खुद धार्मिक नियमों का पालन नहीं करता या पाप करता है, उसे दूसरों को अम्र बिल मारुफ़ व नही अनिल मुंकर का अधिकार या फ़रीज़ा हासिल है? या पापी होने की वजह से यह ज़िम्मेदारी खत्म हो जाती है?
जवाब: अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुंकर, सलाह देने वाले के लिए यह शर्त नहीं है कि वह उन सभी नियमों का पालन करे जिनकी वह सलाह दे रहा है, या उन पापों से पूरी तरह बचे जिनसे वह दूसरों को रोक रहा है।
अर्थात, हुक्म देना और मना करना पापी इंसान पर भी ज़रूरी है, और वह यह बहाना बनाकर इस बड़ी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता कि “मैं खुद पाप करता हूँ।”
धार्मिक जगहों पर उन लोगों की कड़ी निंदा की गई है जो खुद कुछ नहीं करते बल्कि दूसरों को करने के लिए बुलाते हैं, या जो खुद पाप करते हैं और दूसरों को मना करते हैं। हालाँकि, यह बुराई इस बात पर आधारित है कि उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी पर काम नहीं किया, न कि इस बात पर कि उन्होंने अम्र बिल मारुफ़ और नही अनिल मुंकर किया।
यानी, असली कमी उनका खुद कुछ न कर पाना है, न कि उनका दूसरों को अच्छा करने के लिए बुलाना या बुरा करने से मना करना।
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