सोमवार 23 फ़रवरी 2026 - 10:28
क़ुरआन को लोगों की रोज़ाना ज़िंदगी का हिस्सा बनाना है

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुरजी ने आयतों के साथ ज़िंदगी के वसीअ पैमाने पर इशारा करते हुए कहा कि यह क़ुरआनी तहरीक़ सिर्फ़ नारे या महज़ तिलावत तक महदूद नहीं है, बल्कि इसका मक़सद आयात-ए-क़ुरआन को लोगों की रोज़ाना ज़िंदगी का हिस्सा बनाना है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुरजी, महानिदेशक इस्लामी तब्लीग़ात हमदान, ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में माहे-रमज़ान को क़ुरआन की तरफ अमली रुजूअ का बे-मिसाल मौक़ा क़रार दिया और कहा कि यह मुबारक महीना मोमिनीन की फ़र्दी और इज्तिमाई ज़िंदगी में क़ुरआन की महजूरियत को ख़त्म करने का अहम मोड़ साबित हो सकता है।

उन्होंने क़ुरआन के हिदायती मुक़ाम की तरफ इशारा करते हुए कहा कि क़ुरआन सिर्फ़ रस्मी तिलावत या घरों में सजाकर रखने के लिए नाज़िल नहीं हुआ, बल्कि यह इंसानी ज़िंदगी और सआदत का मुकम्मल नुस्ख़ा है। अगर इसकी तालीमात पर अमल न किया जाए तो इंसान राह-ए-हिदायत से दूर हो जाता है।

महानिदेशक इस्लामी तब्लीग़ात हमदान ने “नेहज़त-ए-मिल्ली ज़िंदगी बाअयात” को मुल्क के अहम तरीन क़ुरआनी प्रोग्रामों में से एक बताते हुए कहा कि यह तहरीक़ तदब्बुर और आयात-ए-इलाही पर अमल को मरकज़ी अहमियत देती है। पिछले तीन सालों से इसे क़ौमी सतह पर चलाया जा रहा है और इसने क़ुरआन को अवाम की ज़िंदगी के क़रीब लाने में अहम किरदार अदा किया है।

उन्होंने इस क़ुरआनी तहरीक़ के असरात बयान करते हुए कहा कि गुज़िश्ता माहे-रमज़ान में लाखों अफ़राद ने इस मुहिम में हिस्सा लिया और मुन्तख़ब आयात का वसीअ पैमाने पर हिफ़्ज़ एक कम-नज़ीर क़ुरआनी वाक़िआ रहा, जिसे रहबर-ए-मुअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब की तरफ से ख़ास तौर पर सराहा गया।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुरजी ने बताया कि इस साल भी माहे-रमज़ान के दौरान हर रोज़ एक आयत मुन्तख़ब की गई है और उसके मफ़ाहिम को मुंतक़िल करने के लिए मुख़्तलिफ़ उम्री ग्रुप्स, ख़ुसूसन नौजवानों के लिए, साक़ाफ़ती, फ़न्नी और मीडियाई पैकेज तैयार किए गए हैं।

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