मंगलवार 24 फ़रवरी 2026 - 21:24
धार्मिक दृष्टिकोण में महदवियत न्याय की बुनियाद पर भविष्य को मजबूत करती है

हौज़ा / मेंहदवियत की विशेषज्ञ ने कहा, धार्मिक दृष्टिकोण में मेंहदवियत, भविष्य के क्षितिज को न्याय की बुनियाद पर और वर्चस्व पर आधारित संरचनाओं की अस्वीकार के साथ तरसीम करती है। वर्तमान दौर में महदवियत के विषयों की ओर बढ़ती हुई तवज्जो इस बात की निशानी है कि समाज पहले से कहीं ज़्यादा मौजूदा तब्दीलियों की फ़िक्री जड़ों और आने वाले के मंज़रनामे को समझने का इच्छुक है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मेंहदवियत के विशेषज्ञ मोहतरमा ख़ानम तमीज़कार ने मदरसा ए इल्मिया हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल. काशान में आयोजित महदवियत के एक तख़स्सुसी (विशेषज्ञ) जलसे में ईमान के समाजी और सियासी रुझानों की तश्कील (निर्माण) में किरदार (भूमिका) पर रौशनी डालते हुए कहा, दीनी निगाह में महदवियत, भविष्य के क्षितिज को अद्ल (न्याय) की बुनियाद पर और ग़लबा ए व तसल्लुत पर आधारित हैं।

संरचनाओं की अस्वीकार के साथ वाज़ेह (स्पष्ट) करती है और अलाकाई (क्षेत्रीय) सतह पर पाए जाने वाले कई संकटों का तज्ज़िया (विश्लेषण) इसी अद्ल-मेहवर (न्याय-केंद्रित) निगाह और आलमी ताक़त-मेहवर जरियानों (धाराओं) के तक़ाबुल (तुलना/टकराव) के तनाज़ुर में किया जा सकता है।

मरकज़ ए तखस्सुसी मेंहदवियत काशान की निदेशक ने दीनी तज्जियात में सियासी सहयुनियत (राजनीतिक ज़ायोनीवाद) को इम्तियाज़ (विशेषाधिकार) और इजारा दही पर मबनी नमूनों (उदाहरणों) की एक मिसा क़रार देते हुए कहा,मौऊदियत (प्रतीक्षित सिद्धांत) के नुक्ता ए नज़र (दृष्टिकोण) से ऐसे ख़यालात की आदिलाना मुस्तक़बिल के निज़ाम (प्रणाली) के तहक़्क़ुक में कोई जगह नहीं होगी।

उन्होंने आगे कहा: महदवियत के विषयों पर बढ़ती हुई तवज्जो इस बात की निशानदेही करती है कि मुआशरा (समाज) पहले से कहीं ज़्यादा मौजूदा हालात की फ़िक्री बुनियादों और मुस्तक़बिल (भविष्य) के उफ़ुक़ को समझने की खोज में है।

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