हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मजलिस ए ख़बरगान-ए-रहबरी में क़ज़वीन के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन अली इस्लामी ने ताकिस्तान शहर के ज़िला अधिकारियों से मुलाकात के दौरान कहा कि मुसलमानों की एकता और एकजुटता सफलता की कुंजी है। कुरआन-ए-करीम में भी एकता पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान की प्रतिष्ठा और शक्ति के कारण साम्राज्यवादी व्यवस्था और उसके प्रमुख तत्वों का वास्तविक चेहरा दुनिया की जनता और स्वतंत्र लोगों के सामने उजागर हो गया है।
क़ज़वीन के प्रतिनिधि ने कहा कि आज यमन और फ़िलिस्तीन में प्रतिरोध समूह खाली हाथ वैश्विक साम्राज्यवाद के सामने डटे हुए हैं और इस समय हम अमेरिका की खोखली शक्ति और उसके रौब में लगातार कमी देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के शुरुआती दिनों और आठ वर्षीय पवित्र रक्षा के दौरान युवाओं की नेतृत्व क्षमता तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में उनकी प्रभावी भागीदारी उन महत्वपूर्ण कारणों में से थी, जिनकी वजह से ईरानी राष्ट्र की नवोदित क्रांति आंतरिक और बाहरी चुनौतियों तथा खतरों के सामने मजबूती से डटी रही और विभिन्न परीक्षाओं में सफल हुई।
मजलिस-ए-ख़बरगान-ए-रहबरी के सदस्य ने आगे कहा कि अगर आज इस्लामी गणराज्य ईरान की व्यवस्था आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति और गौरव रखती है, तो इसका मूल कारण विलायत की आज्ञापालन की छाया में जनता की एकता और एकजुटता है।
उन्होंने कहा कि आज प्रतिरोध मोर्चा पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और उत्साहपूर्ण है तथा दुश्मन खुद भी जानता है कि उसके पतन और विनाश का समय करीब आ रहा है।
हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन अली इस्लामी ने कहा कि अगर इस्लामी दुनिया की कुछ सरकारें इन नरसंहारों के सामने खामोश न रहतीं, तो निश्चित रूप से यह ज़ायोनी शासन अब तक अपने अस्तित्व के अंत का सामना कर चुका होता।
उन्होंने अंत में कहा कि आज क्षेत्र में होने वाली तमाम साज़िशें, युद्ध और रक्तपात अमेरिका, ज़ायोनी शासन तथा क्षेत्र की भ्रष्ट और आश्रित सरकारों की नीतियों का परिणाम हैं।
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