हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अत्यंत दुख और टूटे हुए दिलो की गहराई के साथ हौज़ा हाए इल्मिया, विद्वानो, छात्रो और सबी ईमान वालो, इस्लामी क्रांति के महान नेता हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई (रिजवानुल्लाह तआला अलैह) की शहादत पर हज़रत वली अस्र (अ) मराज ए ऐज़ाम तक़लीद, इस्लामी गणराज्य ईरान की सम्मानित जनता और पूरी इस्लामी उम्मत की सेवा मे संवेदना व्यक्त करते है।
वह ज़ुल्म और गुमराही के आलमी तूफ़ान मे मार्गदर्शन की रोशन शमा थे। उन्होने इस्लामी विवेक, बुद्दित्ता और क्रांतीकारी सादगी के साथ हमेशा इस्लाम नाब मुहम्मदी के ध्वज को ऊंचा रखा।
उनकी निरंतर प्रयास और विवेकपूर्ण नेतृत्व का परिणाम ईरान का सम्मान और सरबुलंदी, इस्लामी उम्मत की एकता नवीन इस्लामी की संस्कृति आंदोलन के रूप मे सामने आई। इस महान नेता की स्मृति और उनके स्पष्ठ मार्ग हमेशा ईरानी जनता और हौज़ा हाए इल्मिया के दिलो मे जीवित रहेगा।
हम अल्लाह के दरबाह मे दुआ करते है कि अल्लाह तआला इस नेक बंदे की आत्मा को रसूल अकरम और औलिया ए इलाही के साथ महशूर करें और इस्लामी गणराज्य ईरान की जनता को सदैव विलायत के साथ दृढता प्रदान करे।
अब जनता के सम्मानित विशेषज्ञो ने इस महान नेता के स्वर्गवास के बाद उस महत्वपूर्ण पद के लिए एक योग्य नेता का च्यन किया है, हम देश के धार्मिक मदरसो के छात्रो और विद्वानो अपनी एतिहासिक और दिव्य ज़िम्मेदारी को ध्यान मे रखते हुए स्वंय पर लाज़िम समझते है कि इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता हज़रत आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनई (द ज) के साथ एक नया वादा करें।
हम इस बात पर विश्वास रखते है कि विलायत के मार्ग की निरंतरता ही वर्तमान समय मे इस्लाम की मज़बूती का राज़ है, और धर्म की बक़ा, मिल्लत की आज़ादी और इस्लाम का सम्मान, वली फ़क़ीह के अनुसरण मे छुपा है। इसीलिए हौज़ा हाए इल्मिया को क्रांतिकारी उद्देश्यो की तकमील और इस्लामी संस्कृति की स्थापना मे हमेशा अग्रणीय रहना चाहिए।
अतः हम यह वादा करते है किः
1- ज्ञान की प्राप्ति, नफ़्स का सुधार और इलाही पहचान के बढ़ावे के मार्ग मे सुप्रीम लीडर के मार्गदर्शन का अनुसरण करेगें।
2- विवेक के साथ संस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक मैदानो मे सक्रिय भूमिका निभाते हुए क्रांति के वैचारिक और अध्यात्मिक धरोहर की रक्षा करेंगे।
3- हौज़ा ए इल्मिया को जागरुकता, एकता और जनता की ईमानदारी से सेवा का केंद्र बनाएगे।
4- इस्लाम और विलायत के खिलाफ़ होने वाली वैश्विक यलग़ार के सामने बौद्धिक, नैतिक और ईमानी अंदाज़ मे सुरक्षा करेंगे।
इस्लामी क्रांति के नए सुप्रीम लीडर के साथ हमारा यह ईमानी मीसाक़, ज़िम्मेदारी और अल्लाह से प्रेम पर आधारित एक वादा है, विलायत के महवर पर स्थापित ऐसा शुद्ध वादा जो हज़रत साहेबज़ ज़मान (अ) के ज़ूहूर तक बाकी रहेगा।
हौज़ा ए इल्मिया से संबंधित सम्मानित व्यक्ति भी नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से अपने वादा नामा की पुष्टि करके इस अहद मे शरीक हो सकते है।
https://search.eitaa.com/?url=https://survey.porsline.ir/s/V0HsdV0b
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