सोमवार 16 मार्च 2026 - 10:58
संयुक्त राष्ट्र हमेशा ज़ुल्म और ज़ालिम का साथ देता हैं

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन ग़ुलामअली सफ़ाई बुशहरी ने कहा कि सुरक्षा परिषद का इतिहास बहुत काला है। उन्होंने कहा कि यह परिषद स्वतंत्र और मजलूम देशों पर ज़ुल्म की जगह बन चुका है।संयुक्त राष्ट्र हमेशा ज़ुल्म और ज़ालिम का साथ देता हैं

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम सफ़ाई बुशहरी ने मस्जिद-ए-इमाम हसन मुज्तबा (अ.) बुशहर में दर्स-ए-अख़लाक़ के दौरान कहा कि हमारे महान नेता की शहादत के बाद तक़लीद के विषय में उलमा और फुक़हा का विचार है कि “मय्यत की तक़लीद पर बाक़ी रहना जायज़ है।

उन्होंने बताया कि इस विषय में कुछ मतभेद हैं कुछ इसे हर मसले में मानते हैं, कुछ उन मसलों में जिन पर अमल किया जा चुका हो, और कुछ का मत है कि यदि मृत फक़ीह नए मसलों में सबसे आलिम हो तो उसकी तक़लीद भी जायज़ है।

उन्होंने कहा: रमज़ान का महीना इंसान के स्वयं पर नियंत्रण का महीना है। इस महीने में गुनाह कम हो जाते हैं, मस्जिदों में नमाज़ और दुआएं बढ़ जाती हैं, और समाजिक अपराध भी कम होते हैं।

उन्होंने ज़ुबान के प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़ुबान इंसान का सबसे सक्रिय अंग है, और हदीस में आया है कि इंसान की अधिकतर ग़लतियाँ ज़ुबान से होती हैं। बुद्धिमान व्यक्ति सोच-समझकर बोलता है यही कारण है कि अकलमंदों की बातें कम होती हैं क्योंकि वे यह सोचते हैं कि उनका कथन इंसानी और इलाही है।

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद वास्तव में औपनिवेशिक देशों की सुरक्षा परिषद है। इसका गठन इसीलिए हुआ ताकि वे खुद सुरक्षित रहें। इतिहास गवाह है कि इस परिषद के निर्णय हमेशा उन्हीं देशों के हित में हुए और मज़लूमों के पक्ष में कभी कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि यह परिषद विवेकशील और जागरूक लोगों की नज़र में कोई महत्त्व नहीं रखती, और ईरान की जनता भी इसे नकारती व निंदा करती है।

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