हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , अलअज़हर ने कहा कि मुसलमानों को इस पवित्र समय में उनकी इबादत से वंचित करना एक गंभीर अपराध है।
अल-अज़हर ने जोर दिया कि यह कदम दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं का अपमान है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है क्योंकि वे धार्मिक स्थलों पर हमले को अपराध मानते हैं।
यह व्यवहार कब्जाधारियों द्वारा मस्जिद-ए-अक़्सा और पवित्र शहर क़ुद्स शरीफ़ की इस्लामी पहचान मिटाने और मुसलमानों की धार्मिक खुशी छीनने का प्रयास है।
अलअज़हर ने फिर दोहराया कि मस्जिद-ए-अक़्सा हमेशा से एक शुद्ध इस्लामी पवित्र स्थान रहा है और रहेगी; उसमें ज़ायोनिस्टों का कोई अधिकार नहीं है। संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अरब व इस्लामी जगत से अपील की कि वे इस पवित्र स्थल की रक्षा करें और वहाँ इबादत करने वाले लोगों के लिए स्वतंत्रता, सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करें।
एक रिपोर्टों के अनुसार,फरवरी के अंतिम सप्ताह में इसराइली बलों ने मस्जिद-ए-अक़्सा को बंद कर दिया, नमाज़ियों को बाहर निकाल दिया और वहाँ इशा और तरावीह की नमाज़ रोक दी।
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