हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत आयतुल्लाह नूरी हमदानी का संदेश डॉ. अली लारिजानी की शहादत पर इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
आयतुल्लाह आक़ा हाजी शेख सादिक आमोली लारिजानी (दामत बरकातुहु)
सलामु अलैकुम
आदरणीय विद्वान डॉ. अली लारिजानी रिज़वानुल्लाहि तआला अलैह और उनके सम्मानित पुत्र की शहादत को मैं आपको, सभी संबंधितों और सम्पूर्ण सम्मानित ईरानी राष्ट्र को तबरीक और शोक-संवेदना प्रस्तुत करता हूँ।
इस सम्मानित शहीद जैसे विशिष्ट व्यक्तित्व का वियोग हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने अंदर धर्म और राजनीति, बुद्धि और ज्ञान तथा कर्म को समेटा हुआ था। वाणी में गंभीरता और व्यवहार में संतुलन तथा इस्लामी गणतंत्र के विभिन्न कालों में अनेक पदों पर प्राप्त सफल अनुभवों चाहे वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सिपाह-ए-पासदारान) में उपस्थिति हो संस्कृति मंत्रालय का कार्यभार हो, रेडियो और टेलीविज़न (सदा व सीमा) का प्रबंधन हो इस्लामी शूरा संसद के तीन कार्यकालों तक अध्यक्षता हो या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिवालय हो इन सबने उन्हें एक लोकप्रिय और सत्यवादी राजनीतिज्ञ के रूप में पेश किया।
उन्होंने कभी भी घटनाओं के सामने सिर नहीं झुकाया और उपेक्षाओं के सामने धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने हर जगह अपने कार्य का मापदंड शरई कर्तव्य का पालन करना माना।
मैं मानता हूँ कि उन्होंने इन सभी सेवाओं का प्रतिफल अपने परवरदिगार से पाया और सबसे दुष्ट लोगों के हाथों शहादत को प्राप्त हुए। ईश्वर की इच्छा से, उनका मार्ग सम्मानित युवाओं द्वारा मजबूती और शक्ति के साथ जारी रहेगा।
सभी सम्मानित शहीदों, विशेष रूप से इस्लामी क्रांति के शहीद रहबर इमाम ख़ुमैनी र.ह.के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए, मैं परवरदिगार-ए-आलम से आपकी सफलता की कामना करता हूँ, जो स्वयं हौज़ा ए इल्मिया के प्रतिष्ठित और मूल्यवान व्यक्तित्वों में से एक हैं।
हुसैन नूरी हमदानी
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