हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम अलमुकद्दसा में मरकज़ ए फ़िक़ही ए आइम्मा-ए-अतहार के प्रमुख आयतुल्लाह मुहम्मद जवाद फ़ाज़िल लंकरानी ने कहा है कि मौजूदा हालात में जनता की ज्ञानवान और ज़िम्मेदाराना मौजूदगी केवल एक सामाजिक कार्य नहीं है, बल्कि एक महान इबादत है और इस्लाम व वतन की हिफाज़त के लिए जनता की जागरूकता हज़ारों रात की नमाज़ से भी ऊंचा दर्जा रखती है।
आयतुल्लाह मुहम्मद जवाद फ़ाज़िल लंकरानी ने क़ुम अल मुकद्दसा में हर हफ़्ते आयोजित होने वाली जनता की रैली के अवसर पर बातचीत करते हुए कहा कि जनता की सड़कों पर शऊर और जागरूक मौजूदगी ने एक महान दीनी, इंक़ेलाबी और मिल्ली ज़िम्मेदारी को व्यावहारिक रूप दे दिया है।

उन्होंने कहा कि शहीद रहबर,शहीद सुलेमानी ने जनता के कंधों पर जो ज़िम्मेदारी डाली थी, आज वह उम्मीद से बढ़कर सामने आ रही है। उनके अनुसार, समाज के विभिन्न वर्गों, ख़ास लोगों, अहल-ए-फ़िक्र और आम लोगों ने अपनी कुर्बानी, बसीरत (दूरदर्शिता) और इस्तिक़ामत से पूरी दुनिया पर हुज्जत पूरा कर दिया है।
आयतुल्लाह फ़ाज़िल लंकरानी ने कहा कि यद्यपि इस राह में महान हस्तियों ने शहादत का प्याला पिया, लेकिन यदि इसके परिणामस्वरूप क़ौम में शऊर बेदारी और मैदान में मौजूदगी पैदा हुई है, तो यह इस्लाम, इंक़ेलाब और मकतबे अहल-ए-बैत की बक़ा की बड़ी गारंटी है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनता की वर्तमान जागरूक मौजूदगी हज़ारों रात की नमाज़ से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि यह कार्य वास्तव में इस्लाम, वतन और मिल्लत की रक्षा का व्यावहारिक रूप है।
उन्होंने एक रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम ने फरमाया है कि इस्लाम और सरज़मीन-ए-इस्लाम की एक रात की हिफाज़त, हज़ार रातों की इबादत से अफज़ल है।
उन्होंने आगे कहा कि ईरानी क़ौम की फ़ौलादी इस्तिक़ामत ने इस्तिकबारी ताकतों के घमंड को तोड़ दिया है और आज दुश्मन इस जनता के संकल्प और हौसले के सामने बेबस दिखाई देती है।
आयतुल्लाह फ़ाज़िल लंकरानी ने अंत में दुआ की कि अल्लाह तआला इस इंक़ेलाब को और अधिक क़ुव्वत इज़्ज़त और पायदारी प्रदान करे और जनता के इस शऊरी भूमिका को हमेशा बनाए रखे।

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