बुधवार 6 मई 2026 - 08:25
दुनिया में जो हो रहा है, वह एक ऐतिहासिक बदलाव और ताकतों के वर्चस्व के क्रमिक पतन की शुरुआत हैः अल रेफ़ाई

अल्जीरिया के प्रमुख सूफ़ी विद्वान और रेफाई सूफी सिलसिला के नेता शेख ताजुद्दीन अल-रेफाई ने 'कादिमून ग्लोबल असेम्बली' के कार्यक्रम 'उफुक-ए-फतह (विजय का क्षितिज)' में जोर देकर कहा कि दुनिया में जो हो रहा है, वह एक ऐतिहासिक बदलाव और ताकतों के वर्चस्व के क्रमिक पतन की शुरुआत है, और प्रभुत्व पर आधारित ताकतें बाहरी हार से पहले ही आंतरिक रूप से क्षरण का शिकार हो जाती हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 'कादिमून ग्लोबल असेम्बली' के तत्वावधान में 'उफुक-ए-फतह; अमेरिकी वर्चस्व का अंत और नई विश्व व्यवस्था का उदय' नामक टेलीविजन कार्यक्रम को विभिन्न देशों के धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्वों की उपस्थिति में आयोजित किया गया, जिसे अल-कोसर और सफीर चैनलों पर प्रसारित किया गया।

अल्जीरिया के प्रमुख विद्वान और रेफ़ाईया सूफी सिलसिला के नेता शेख ताजुद्दीन अल-रिफाई ने अपने भाषण में जोर देकर कहा: आज जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है, वह एक क्षणिक घटना या सामरिक बदलाव नहीं है, बल्कि एक गहन ऐतिहासिक बदलाव और वैश्विक परिवर्तनों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत है।

'निर्विवाद शक्ति के मिथक के पतन' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा: जो ताकतें प्रभुत्व और श्रेष्ठता पर आधारित होती हैं, वे बाहर से पराजित होने से पहले ही अंदर से ही क्षरण का शिकार हो जाती हैं, और यह इतिहास में एक ईश्वरीय परंपरा (सुन्नत-ए-इलाही) है।

इस अल्जीरियाई विद्वान ने आगे कहा: जब भी मूल्य कमजोर पड़ते हैं और न्याय चयनात्मक दृष्टिकोणों को अपना स्थान दे देता है, तो पतन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, और इसके लक्षण निर्णय लेने में भ्रम, बढ़ते संकटों और वैधता में कमी के रूप में प्रकट होते हैं।

शेख अल-रेफ़ाई ने इस बात पर जोर देते हुए कि शक्ति केवल सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं है, कहा: वास्तविक शक्ति वैधता, जन-धारणा (इमेज) और जनता के विश्वास का मिश्रण होती है, और जब ये घटक कमजोर पड़ जाते हैं, तो शक्ति का ढांचा भी डगमगाने लगता है।

उन्होंने दुनिया में जनता की राय के बदलते माहौल की ओर भी इशारा करते हुए कहा: आज एकतरफा वृतांत (नैरेटिव) जनता की राय को आकार नहीं दे सकते, और राष्ट्र समझ और विश्लेषण के क्षेत्र में सक्रिय खिलाड़ी बन गए हैं।

इस सूफी नेता ने कुरान की शिक्षाओं का हवाला देते हुए स्पष्ट किया: सत्य और असत्य का टकराव इतिहास में एक जारी नियम है, और अंततः, सत्य की ही विजय होगी; भले ही यह मार्ग समय लेने वाला हो।

उन्होंने अंत में जोर देकर कहा: विश्व एक संवेदनशील चरण से गुजर रहा है जो शक्ति, न्याय और विश्व व्यवस्था की अवधारणाओं की पुनःपरिभाषा का कारण बन सकता है, और इस बीच, राष्ट्रों की जागरूकता और जागृति एक निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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