हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत बिहार उल अनवार किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام علی علیهالسلام:
لاتُؤیِس مُذنِباً، فَکم مِن عاکفٍ عَلی ذَنبِهِ خُتِمَ لَهُ بِخَیرٍ
इमाम अली (अ) ने फ़रमायाः
किसी गुनहगार को निराश मत करो, क्योंकि कितने ही गुनाहों पर अड़े रहने वालों का अंत भलाई (अच्छा परिणाम) पर हुआ है।
बिहारुल अनवर, भाग 77, पेज 239, हदीस 1
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