हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आज पूरी दुनिया अमेरिका और इज़राइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध तथा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक वार्ताओं पर नज़र रखती है। लेकिन इसी भीड़ में फ़िलस्तीनी लोग पिछले 78 वर्षों से इजरायलीयो के तबाही के साये में जी रहे हैं।
फ़िलस्तीनी डॉक्टर 'मुनअम' ने नकबा दिवस की वर्षगांठ पर लिखा है कि 1948 में ऐतिहासिक फ़िलस्तीन की आधी आबादी बेघर हो गई, हज़ारों मारे गए, 15 मई को इजरायलीयो ने इतिहास को अपराध से लिखा। 78वें साल भी उन्होंने अक्सा मस्जिद की दीवार पर लिखा कि "एक और नकबा आ रहा है" — हालाँकि नकबा कभी ख़त्म ही नहीं हुआ, बस उसका रूप बदल गया।
1917 में अंग्रेज़ उपनिवेशवाद ने फ़िलस्तीन में कदम रखा तब वहाँ 50 हज़ार से भी कम यहूदी रहते थे। अंग्रेज़ों ने दुनिया भर से यहूदियों का आप्रवास आसान कर दिया। 1948 तक यह संख्या 4.6 लाख हो गई — यह आप्रवास नहीं, जनसंख्या प्रतिस्थापन और नरसंहार की तैयारी थी। अंग्रेज़ों ने ज़ायोनी आतंकी समूह जैसे इरगुन, हगाना, श्टेर्न को हथियार और वित्त दिया। 1947 में इन समूहों ने जातीय सफ़ाई शुरू कर दी। फ़िलस्तीनियों के पास केवल फावड़े और पुराने शिकार राइफलें थीं, जबकि विरोधियों के पास बंदूकें, टैंक और विमान थे। यह युद्ध नहीं, उपनिवेशवाद की देखरेख में सामूहिक फाँसी थी। इसके परिणामस्वरूप सात लाख से अधिक फ़िलस्तीनी बेघर हुए, 400 से अधिक गाँव और शहर नष्ट कर दिए गए।
लेखक के दादा 1948 में याफा से ग़ज़ा पट्टी को चले गए थे। वे हमेशा अपने बागों और पुराने घर की चाबी संभालकर रखते थे, वापसी की आस में, लेकिन वे निर्वासन में ही मर गए। आज ग़ज़ा फिर से उसी नरसंहारकारी विचारधारा से बमबारी झेल रहा है।
क्या अल-अक्सा तूफान के बाद कोई नया तूफ़ान आएगा?
"तूफ़ान अल-अक्सा" ऑपरेशन ने फ़लस्तीन मुद्दे को भुलाए जाने की कगार से बचा लिया। लेकिन करीब तीन साल बाद और ग़ज़ा में दिखावटी युद्धविराम के बाद, मीडिया और राजनीतिक गलियारे ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमले में व्यस्त हैं। फ़िलस्तीनी प्रतिरोध के सवाल अनुत्तरित हैं — क्या वे पुनर्गठन कर रहे हैं या कमज़ोर हो गए हैं?
आज भी फ़िलस्तीन में घरों और खेतों पर कब्ज़ा, यातनाएँ, जंगली हमले और अक्सा मस्जिद का अपमान जारी है। हाल ही में 1,400 से अधिक इजरायली बाशिंदों ने अक्सा मस्जिद परिसर में प्रवेश किया और पैगंबर मोहम्मद (स) का अपमान किया। ग़ज़्ज़ा में कथित युद्धविराम के बाद भी इजरायली कभी भी हत्याएँ करते हैं, हाल ही में क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर 'इज़ुद्दीन अल-हद्दाद' की हत्या की गई।
ग़ज़ा में 46% दवाइयाँ, 66% चिकित्सा उपकरण और 84% प्रयोगशाला सामग्री शून्य स्टॉक पर हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2025 से प्रति सप्ताह औसतन एक फ़िलस्तीनी बच्चा पश्चिमी तट में इज़रायली बलों द्वारा शहीद कर दिया जाता है। नाब्लस के पश्चिमी तट के एक गाँव में सैनिकों ने तीन बार नमाज़ रोकने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने अडिग रहकर नमाज़ पढ़ी।
एक वीडियो में एक यरूशलेम परिवार को उनके पैतृक घर से निकालते दिखाया गया है, ताकि अमेरिकी/यूरोपीय यहूदी परिवार वहाँ बस सकें। नकबा 78 वर्षों से रुका नहीं है, लेकिन फ़िलस्तीन दिल और दिमाग में जीवित है। आज हम नकबा की तीसरी पीढ़ी हैं। हमने पहली बार तूफान अल-अक्सा में अपने अधिकृत क्षेत्रों में प्रवेश किया और कब्जाधारियों को जवाब दिया। हम फ़िलस्तीन की आज़ादी में विश्वास रखते हैं और अंतिम बूंद तक लड़ेंगे। सवाल यह है कि क्या उम्मत एक और तूफान का इंतज़ार करे जो कमज़ोर पड़ चुके मकड़ी के जाले को उखाड़ फेंके?
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