हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ) के सफ़ीर हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) के शहादत के दिन और यौम-ए-अरफ़ा की मुनासिबत से जम्मू-ओ-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियायान के इहतिमाम से वादी के अत्राफ-ओ-अकनाफ में ख़ुसूसी तक़रीब का इन्अकाद हुआ। इस सिलसिले के बड़े इज्तिमात मरकज़ी इमामबाड़ा बडगाम और कदीमी इमामबाड़ा हसनाबाद में मुनअक़िद हुए।
जिन दूसरे मक़ामात पर इस सिलसिले में मजालिस-ए-अज़ा का इन्अकाद किया गया, उनमें ख़ास तौर पर इमामबाड़ा गामदो और इमामबाड़ा बोनह मोहल्ला नौगाम शामिल हैं। इन मक़ामात पर दिन भर मर्सिया-ख़्वानी की गई और दुआ-ए-अरफ़ा का एहतिमाम किया गया।
मरकज़ी इमामबाड़ा बडगाम में अंजुमन-ए-शरई शियायान के सदर हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन आघा सैयद हसन अल-मूसवी अल-सफ़वी ने हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) के किरदार व अमल पर रौशनी डाली और यौम-ए-अरफ़ा की फज़ीलत बयान की। यौम-ए-अरफ़ा की रूहानी अज़मत व अहमियत पर रौशनी डालते हुए आघा सैयद हसन अल-मूसवी अल-सफ़वी ने कहा कि यौम-ए-अरफ़ा इस्लामी तालीमात में निहायत मुक़द्दस, बाबरकत और रूहानी फ़ैयोज़ व बरकात का हामिल दिन है।
जम्मू-कश्मीर; सफ़ीर-ए-हुसैन हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) के यौम-ए-शहादत और यौम-ए-अरफ़ा की मुनासिबत से इज्तिमात: हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) का सानिहा-ए-शहादत मारका-ए-करबला का सरनामा है — आक़ा सैयद हसन।

उन्होंने कहा कि यह दिन तौबा, इसतिग़फ़ार, मुहासबा-ए-नफ़्स, तज़्किया-ए-नफ़्स और बारगाह-ए-इलाही में आजिज़ी व इन्किसारी के इज़हार का दिन है, जिसमें अल्लाह तआला की रहमतों के दरवाज़े अपने बंदों के लिए वसीअ तौर पर खुले रहते हैं।
उन्होंने दुआ-ए-अरफ़ा इमाम हुसैन की मानवी अज़मत पर रौशनी डालते हुए कहा कि यह दुआ मारिफ़त-ए-इलाही, शुक्रगुज़ारी, बंदगी, आजिज़ी, रूहानी बेदारी और अल्लाह तआला की नेमतों के इक़रार का एक अज़ीम सबक़ अपने अंदर समोए हुए है।
अंजुमन-ए-शरई शियायान-ए-जम्मू-ओ-कश्मीर के सदर ने मोमिनीन पर ज़ोर दिया कि वे यौम-ए-अरफ़ा के बाबरकत मौके से भरपूर इस्तिफ़ादा करें, इबादत, दुआ, इसतिग़फ़ार और खिदमत-ए-ख़ल्क़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ और उम्मत-ए-मुस्लिमा के इत्तेहाद, अमन, अदल-ओ-इन्साफ़ और मज़लूम इंसानियत की सरबुलंदी के लिए ख़ुसूसी दुआएँ करें।
हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) के सफ़ारती मिशन और दिलदोज़ शहादत का वाक़िया बयान करते हुए आघा सैयद हसन मूसवी ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) ने अपने चचा ज़ाद भाई को सिर्फ़ इस मक़सद के लिए कूफ़ा रवाना किया कि वह अहले-कूफ़ा की तरफ़ से मौसूल (प्राप्त) अहद-ओ-पैमान-ए-वफ़ा पर मबनी हज़ारों ख़ुतूत (ख़त) की अस्लियत जान सकें, लेकिन 'ऐन यौम-ए-अरफ़ा' के रोज़ यज़ीदी हुकूमत के करिंदों ने हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) को मस्जिद-ए-कूफ़ा के बुलंद-क़ामत गुंबद से गिरा कर दर्जा-ए-शहादत पर पहुँचाया।
सय्यद हसन ने कहा कि हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील (अ) का सानिहा-ए-शहादत मारका-ए-करबला का सरनामा और सफ़ारत-कारी की तारीख़ का कर्बनाक बाब है।
इस मौके पर आघा सैयद हसन अल-मूसवी अल-सफ़वी ने जम्हूरिया-ए-इस्लामी ईरान के शहीद रहबर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनेई (र) और ईरान-ए-इस्लामी के दीगर शोहदा को ज़बरदस्त ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
उन्होंने इस्लामी क्रांति के नेता हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा अली ख़ामेनेई की क़यादत को ख़िराज-ए-तहसीन पेश करते हुए ईरानी क़ौम की इस्तिक़ामत, बसीरत और दुश्मनान-ए-इस्लाम के मुक़ाबले में साबित-क़दमी की सराहना की।
आघा हसन ने कहा कि मिल्लत-ए-ईरान ने हमेशा इस्लाम, मुक़ावमत और हक़-ओ-अदालत के दिफ़ा में बेमिसाल क़ुरबानियाँ पेश की हैं। उन्होंने ईरानी क़यादत, अफ़वाज और अवाम की कामयाबी, सलामती और दुश्मनान-ए-इस्लाम के ख़िलाफ़ फतह-ओ-नुसरत के लिए ख़ुसूसी दुआ भी की।
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