हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , बहरैन के उच्च न्यायालय ने मुख़्तलिफ़ मुक़द्दमात में दर्जनों शिया शहरियों के ख़िलाफ़ सख़्त फ़ैसले सुनाए हैं, जिनमें एक आलिम-ए-दीन और दो ख़वातीन भी शामिल हैं।
दहशतगर्दी के मुक़द्दमात के चीफ़ प्रॉसिक्यूटर ने ऐलान किया कि अदालत ने तीन शहरियों को गिरफ़्तार किया है, जिन पर इस्राईल और अमेरिका की तरफ़ से ईरान के ख़िलाफ़ किए गए हमलों की मज़म्मत करने का इल्ज़ाम लगाया गया है।
मक़ामी ज़राए के मुताबिक उम्रक़ैद की सज़ा पाने वालों में सैयद मुहम्मद हादी हसन, सैयद मुहम्मद फ़ज़्ल हमीद, यूसुफ़ अहमद सरहान, सहलान अब्दुर्रज़ा महदी, अब्बास अब्दुल्लाह मतर, मुर्तज़ा हुसैन अवाल, शिया रूहानी शैख़ अहमद ईसा अल-हाइकी और एक अन्य फ़र्द शामिल हैं जो इस वक़्त मुल्क से बाहर मौजूद हैं।
इसके अलावा अली हुसैन अली आल अबूद को 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई, जबकि सारा अब्दुन्नबी हबीब और इलियास सलमान मिर्ज़ा को तीन-तीन साल क़ैद की सज़ा दी गई।
एक रिपोर्ट के मुताबिक ये सजाएँ बहरैनी हुक्काम की तरफ़ से शिया शहरियों के ख़िलाफ़ झूठे इल्ज़ामात के तहत मुक़द्दमे क़ायम करने के एजेंडे के तहत दी गई हैं। ये इक़्दामात एक इंतिक़ामी मुहिम का हिस्सा बताए गए हैं, जिसमें सैकड़ों शहरियों को निशाना बनाया गया है।
यह मुहिम उस वक़्त शुरू हुई जब मनामा में अमेरिकी अड्डों और मफ़ादात पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद बहरैनी फ़ौजी इदारे ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई में नाकाम रहे। रिपोर्ट के अनुसार यह घटनाक्रम उस जंग के दौरान पेश आया जिसे अमेरिका और सिय्योनिस्ती हुकूमत ने 28 फ़रवरी 2026 को ख़लीज-ए-फ़ार्स के कुछ ममालिक की हिमायत से ईरान के ख़िलाफ़ शुरू किया था।
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