हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मजमा उलमा वा खुतबा हैदराबाद दक्कन के शोक संदेश का पाठ निम्नलिखित है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम
मजमा उलमा वा खुतबा हैदराबाद अत्यंत शोक और गम के साथ मरजा-ए-आली क़द्र, फ़क़ीह-ए-अहले-बैत (अ), समाहत आयतुल्लाहिल उज़्मा शेख मुहम्मद इस्हाक़ अल-फय्याज़ (क़) के दुखद निधन पर हज़रत इमाम-ए-अस्र (अ), हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़-ए-अशरफ, उलमा-ए-इकराम, तुल्लाब-ए-उलूम-ए-दीनीया, मुक़ल्लिदीन और समस्त इस्लामी जहान की सेवा में ताज़ियत और तस्लीयत प्रस्तुत करता है।
मरहूम मरजा-ए-आली क़द्र ने अपनी पूरी ज़िंदगी इस्लाम के दीन, मकतब-ए-अहले-बैत (अ), फ़िक़्ह-ए-जाफ़री और उम्मत-ए-मुस्लिमा की रहनुमाई के लिए वक्फ कर दी। आपका इल्मी मक़ाम, तक़्वा, ज़ुह्द, इख़्लास और बेमिसाल खिदमात हमेशा याद रखी जाएंगी। आप की रेहलत शिया जगत के लिए एक अज़ीम और नाकाबिल-ए-तलाफ़ी नुक़सान है।
हम बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूम के दरजात बुलंद फरमाए, उन्हें जिवार-ए-मुहम्मद व आले मुहम्मद (स) में आला मकाम अता फरमाए और तमाम पसमंदगान, शागिर्दों, मुक़ल्लिदीन और सोगवारों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैहे राजेऊन
शरीके गम: मजमा उलमा वा खुतबा हैदराबाद

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