हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत “कामिल-उज़-ज़ियारात” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال الامام الصادق عليه السلام:
إِنَّ فَاطِمَةَ بِنْتَ مُحَمَّدٍ صلی الله علیه وآله تَحْضُرُ لِزُوَّارِ قَبْرِ ابْنِهَا الْحُسَیْنِ علیه السلام فَتَسْتَغْفِرُ لَهُمْ ذُنُوبَهُمْ.
इमाम सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:
“निःसंदेह फ़ातिमा बिन्त मुहम्मद (स) अपने पुत्र हुसैन (अ) की क़ब्र की ज़ियारत करने वालों के पास आती हैं और उनके गुनाहों की माफ़ी के लिए अल्लाह से दुआ करती हैं।”
कामिल-उज़-ज़ियारात, पेज 118
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