मंगलवार 11 अगस्त 2026 - 15:15
हुर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिका के नियंत्रण में है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर हुर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ऐसे दावे किए हैं, जिन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार रात व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है और इस समय उस पर केवल अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ऐसे दावे किए हैं, जिन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार रात व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है और इस समय उस पर केवल अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ने जलडमरूमध्य को समुद्री बारूदी सुरंगों से पूरी तरह साफ कर दिया है।

ट्रंप ने दावा किया,अभी होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है। इसे नियंत्रित करने वाला एकमात्र पक्ष अमेरिकी नौसेना है।उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को अभेद्य दीवार” बताते हुए कहा कि अमेरिका अपनी इच्छा के अनुसार लोगों को जलडमरूमध्य से आने-जाने की अनुमति दे रहा है।

हालांकि, ट्रंप के इन दावों में विरोधाभास साफ दिखाई देता है। यदि जलडमरूमध्य वास्तव में पूरी तरह खुला है, तो किसी देश या जहाज को ईरान की ओर जाने से रोकने की बात उसके खुले होने के दावे पर ही सवाल खड़ा करती है। किसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर नियंत्रण और उसे सभी के लिए स्वतंत्र रूप से खुला रखने के दावे को एक साथ सही नहीं माना जा सकता।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने पूरे होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर “100 प्रतिशत नियंत्रण” स्थापित कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि, ईरान अभी भी परेशानी पैदा कर सकता है। यह बयान स्वयं उनके उस दावे को कमजोर करता है जिसमें वह जलडमरूमध्य पर पूर्ण अमेरिकी नियंत्रण की बात कर रहे हैं।

ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर भी ट्रंप ने कई कठोर दावे किए। उन्होंने ईरान को “दिवालिया” बताते हुए कहा कि उसके पास पैसा नहीं है और देश में महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इसके अलावा उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों से मध्य-पूर्व में “दबंग” बने रहने का आरोप लगाया और सैकड़ों हजार लोगों की मौत के लिए उसे जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की।

ट्रंप ने इराक़ में अमेरिकी सैनिकों के ख़िलाफ़ प्रतिरोध समूहों के हमलों का आरोप भी ईरान पर लगाया और कहा कि, अब ईरान को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि, इस तरह के आरोपों के जरिए क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य भूमिका और लंबे समय से जारी उसके हस्तक्षेप से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईरान द्वारा हालिया युद्ध में हुए नुकसान के लिए अमेरिका से मुआवज़े की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने उलटे ईरान से मुआवज़ा मांगने की बात कही। उन्होंने यूएसएस कोल पर हुए हमले और अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने तथा घायल होने का हवाला दिया।

अंत में ट्रंप का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि वाशिंगटन अपनी सैन्य कार्रवाइयों और क्षेत्रीय नीतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दूसरे पक्ष पर आरोप लगाकर देने की कोशिश कर रहा है।

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