मंगलवार 7 जुलाई 2026 - 05:21
मस्जिद ए जमकरान से मासूमा के हरम तक का मार्ग आज लोगों की भावनाओं, आँसुओं और श्रद्धांजलि का साक्षी बनेगा

क़ुम के लोगों की नम आँखें और बेचैन दिल मंगलवार, 7 जुलाई 2026 की सुबह का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि वे "ईरान के शहीद नेता" कहे जाने वाले इस व्यक्ति और उनके साथियों के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दे सकें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, पवित्र शहर क़ुम, जो इस्लामी क्रांति का प्रमुख केंद्र और धार्मिक जागरण की भूमि माना जाता है, एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय दिन के लिए तैयार है। तेहरान में आयोजित विशाल और उत्साहपूर्ण अंतिम विदाई के बाद अब क़ुम के लोगों की आँखें नम हैं और उनके दिल बेचैन हैं। वे मंगलवार, 16 तीर की सुबह का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि "ईरान के शहीद" कहे जाने वाले इस व्यक्ति और उनके साथियों को अंतिम विदाई दे सकें। यह शहर, जिसकी गलियों में हमेशा शहादत और आध्यात्मिकता की महक महसूस की जाती है, शोक में डूबा हुआ है और एक श्रद्धापूर्ण समारोह के माध्यम से दिवंगत नेताओं को विदा करने की तैयारी कर रहा है।

समारोह आयोजन समिति के अनुसार, इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम की तैयारियाँ इस प्रकार की गई हैं कि सभी श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकें। कार्यक्रम के अनुसार, इस सम्मानित शहीद के पार्थिव शरीर के साथ विदाई समारोह मंगलवार की सुबह फ़ज्र की अज़ान के समय से मस्जिद ए जमकरान में शुरू होगा। यह स्थान, जहाँ हमेशा इमाम महदी (अ) के इंतज़ार करने वाले लोग दुआ और इबादत करते हैं, इस बार उस व्यक्ति की अंतिम विदाई का केंद्र बनेगा जिसने अपना पूरा जीवन इस्लाम की उन्नति और लोगों की सेवा में बिताया।

सुबह लगभग 6 बजे यह समारोह अपने सबसे भावुक क्षण पर पहुँचेगा, जब प्रमुख धर्मगुरुओं की अगुवाई में शहीदों के पार्थिव शरीर पर नमाज़े जनाज़ा अदा की जाएगी। जमकरान की आध्यात्मिक फिज़ा में लोगों की तकबीर और दुआ की गूँज एक ऐसे भव्य दृश्य की साक्षी बनेगी जिसे इतिहास याद रखेगा। नमाज़ के बाद शहीद का पार्थिव शरीर जमकरान मस्जिद से हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.) के पवित्र हरम की ओर ले जाया जाएगा। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम यात्रा में शामिल होंगे।

क़ुम, जिसे बलिदान, संघर्ष, ज्ञान और शिया जगत के महान विद्वानों का शहर माना जाता है, आज उस व्यक्ति के शोक में है जिसने इसी भूमि के वातावरण में स्वतंत्रता, साहस और दृढ़ता का पाठ सीखा। यह समारोह केवल एक अंतिम यात्रा नहीं है, बल्कि लोगों और उनके शहीद नेता के आदर्शों के प्रति निष्ठा और सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है। इस मार्ग पर उठाया गया हर कदम शहीदों के बलिदान और उनके आदर्शों के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

सभी नागरिकों, ज़ायरीन और समाज के विभिन्न वर्गों से अपील की गई है कि वे बड़ी संख्या में इस समारोह में भाग लें और इसे राष्ट्रीय एकता और सामूहिक श्रद्धांजलि का प्रतीक बनाएँ। क़ुम की प्रशासनिक, सेवा और सुरक्षा एजेंसियाँ भी अपने सभी संसाधनों के साथ प्रयास कर रही हैं ताकि यह कार्यक्रम पूरी व्यवस्था, सुरक्षा और गरिमा के साथ संपन्न हो।

क़ुम एक बार फिर यह दिखाएगा कि वह अपने शहीदों की विरासत को संजोए हुए है। जमकरान मस्जिद से लेकर हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के पवित्र हरम तक का यह मार्ग लोगों की भावनाओं, आँसुओं और श्रद्धांजलि का साक्षी बनेगा। इस अवसर पर लोग अपने शहीदों और उनके आदर्शों को याद करते हुए उन्हें अपने दिलों और इतिहास की स्मृतियों में सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त करेंगे।

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