शुक्रवार 10 जुलाई 2026 - 11:03
शहीद सुप्रीम लीडर का संपूर्ण जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और दृढ़ता का उज्ज्वल उदाहरण था: हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हैदर महदी

मदरसा बिन्तुल हुदा में शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई की याद में साप्ताहिक दर्स-ए-अख़लाक (नैतिक शिक्षा सभा) का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों, उलेमा और मदरसे की छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई (र) की स्मृति में पंजीकृत मदरसा बिन्तुल हुदा, हरियाणा के तत्वावधान में साप्ताहिक दर्स-ए-अख़लाक का आयोजन किया गया, जिसमें उलेमा, शिक्षक और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य शहीद रहबर की शैक्षणिक, नैतिक और क्रांतिकारी सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा नई पीढ़ी को उनके जीवन-चरित्र से परिचित कराना था।

शहीद सुप्रीम लीडर का संपूर्ण जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और दृढ़ता का उज्ज्वल उदाहरण था: हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हैदर महदी

कार्यक्रम की शुरुआत छात्रा सय्यदा करीमा बतूल ने पवित्र क़ुरआन के पाठ से की। इसके बाद छात्रा आफ़रीदा बतूल ने शहीद रहबर की श्रद्धांजलि में मनक़बत (स्तुतिगान) प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ सुना।

इसके बाद मुख्य अतिथि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद हैदर मेहदी (क़ुमी बस्ती) ने "शहीद रहबर के जीवन से नैतिकता, दूरदर्शिता और दृढ़ता का संदेश" विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि शहीद रहबर का पूरा जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और अटूट दृढ़ता का उज्ज्वल आदर्श है।

उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण इस्लाम-ए-नाब-ए-मुहम्मदी (स.), अहलेबैत (अ.) की विलायत, उत्पीड़ितों के समर्थन तथा मुस्लिम उम्मत की प्रतिष्ठा और उन्नति के लिए समर्पित किया। आज मुस्लिम उम्मत, विशेष रूप से युवा पीढ़ी की ज़िम्मेदारी है कि वह उनके विचारों, चरित्र और जीवन-आदर्श को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाए।

शहीद सुप्रीम लीडर का संपूर्ण जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और दृढ़ता का उज्ज्वल उदाहरण था: हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हैदर महदी

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय वैचारिक आक्रमण, नैतिक पतन और सांस्कृतिक चुनौतियों का दौर है। ऐसे समय में शहीद रहबर की शिक्षाएँ हमें धार्मिक दूरदर्शिता, वैचारिक स्वतंत्रता, उम्मत की एकता और अत्याचार के विरुद्ध अडिग रहने का संदेश देती हैं। यदि समाज इस्लामी नैतिकता, ज्ञान और तक़वा को अपना आधार बना ले, तो वह हर प्रकार की वैचारिक और सामाजिक भटकाव से सुरक्षित रह सकता है।

मौलाना सैयद हैदर मेहदी ने आगे कहा कि दीनी शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राएँ भविष्य की शिक्षिकाएँ, मार्गदर्शिकाएँ और समाज के वैचारिक निर्माण की आधारशिला हैं। इसलिए उन्हें ज्ञान के साथ-साथ उत्तम चरित्र, शील, हिजाब, मानव सेवा, निष्ठा और तक़वा को भी अपने जीवन की सबसे बड़ी पूँजी बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दीनी मदरसे केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और एक आदर्श समाज की स्थापना के केंद्र हैं, जहाँ से ज्ञान और कर्म से सुसज्जित व्यक्ति तैयार होकर उम्मत का मार्गदर्शन करते हैं।

शहीद सुप्रीम लीडर का संपूर्ण जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और दृढ़ता का उज्ज्वल उदाहरण था: हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हैदर महदी

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शहीद रहबर की याद मनाना केवल शोकसभा आयोजित करने का नाम नहीं है, बल्कि उनके विचारों, उद्देश्यों, धार्मिक स्वाभिमान, दृढ़ता और इस्लाम की सेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

इस अवसर पर मदरसा बिन्तुल हुदा, हरियाणा की छात्राओं के अतिरिक्त मौलाना सैयद मुहम्मद सक़लैन क़ुमी, मौलाना अकील रज़ा तुराबी (मदरसे के प्रधान), मौलाना सैयद नदीम अब्बास मशहदी, मौलाना मुहम्मद रिज़वान, क़ारी मुहम्मद असजद, ख़्वाहर सैयदा अली फ़ातिमा (शिक्षा प्रभारी) तथा ख़्वाहर अलक़मा बतूल भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के अंत में शहीद रहबर आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई (रिज़वानुल्लाह तआला अलैह) के ईसाल-ए-सवाब, मुस्लिम उम्मत की एकता, समूचे इस्लामी जगत की उन्नति, विश्व के पीड़ित लोगों की सहायता तथा अपने प्रिय देश में शांति और स्थिरता के लिए विशेष दुआ की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों में तबर्रुक (पवित्र प्रसाद) वितरित किया गया।

शहीद सुप्रीम लीडर का संपूर्ण जीवन ईमान, निष्ठा, तक़वा, दूरदर्शिता, साहस और दृढ़ता का उज्ज्वल उदाहरण था: हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हैदर महदी

कार्यक्रम में भाग लेने वालों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि ऐसे शैक्षणिक, वैचारिक और नैतिक कार्यक्रमों का सिलसिला आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि समाज में धार्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और महान व्यक्तित्वों के जीवन-आदर्शों का प्रकाश फैल सके तथा नई पीढ़ी को इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।

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